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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:44 · नई दिल्ली संस्करण

विजया एकादशी : नारायण की कृपा प्राप्ति का विशेष दिन, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
विजया एकादशी : नारायण की कृपा प्राप्ति का विशेष दिन, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। इसके पांच अंग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के अनुसार ही शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। ये रोजाना के कार्य, पूजा-पाठ और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए महत्व रखते हैं। 13 फरवरी शुक्रवार को नारायण को समर्पित विजया एकादशी है।

दृक पंचांग के अनुसार, 13 फरवरी को कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जो दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। एकादशी तिथि 12 फरवरी की दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू होगी। उदयातिथि के अनुसार इसका पूरे दिन मान होगा। फाल्गुन माह, कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले इसी एकादशी का व्रत रखा था। इसलिए इसे विजया एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को करने से भक्तों के रोग और शोक दूर होते हैं, शत्रु पराजित होते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी सफलता मिलने की प्रबल संभावना बताई जाती है।

साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

इस दिन चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे। नक्षत्र मूल है, जो शाम 4 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, उसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा। सूर्योदय 7 बजकर 1 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 10 मिनट पर होगा।

शुभ कार्यों के लिए राहुकाल का विशेष ध्यान रखें। राहुकाल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

अन्य अशुभ समय में यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 23 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 25 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 10 मिनट तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 27 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक है, जो उत्तम माना गया है।

विजया एकादशी का व्रत पारण 13 फरवरी को एकादशी तिथि समाप्त होने के बाद द्वादशी में किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें, व्रत कथा सुनें और फलाहार या जल ग्रहण करें।

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