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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

बुध प्रदोष पर विजय मुहूर्त व अमृतकाल, नोट कर लें भद्रा का समय नई दिल्ली, 14 अप्रैल

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बुध प्रदोष पर विजय मुहूर्त व अमृतकाल, नोट कर लें भद्रा का समय नई दिल्ली, 14 अप्रैल

महादेव । और माता पार्वती की आराधना को समर्पित प्रदोष व्रत 15 अप्रैल बुधवार को है। यह दिन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। बुधवार होने के कारण इसे बुध प्रदोष कहा जाएगा।

इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है। नक्षत्र पूर्व भाद्रपद दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, उसके बाद उत्तर भाद्रपद शुरू होगा।

बुधवार का स्वामी बुध ग्रह है। इसलिए इस दिन का प्रदोष व्रत बुद्धि, वाणी और व्यवसाय में सफलता पाने के लिए बहुत लाभकारी है। बुध प्रदोष का व्रत करने से मेधा शक्ति बढ़ती है, व्यवहार में कुशलता आती है और वाक् कौशल में सुधार होता है। भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए यह व्रत विशेष रूप से किया जाता है।

बुधवार को सूर्योदय 5 बजकर 56 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल की रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। वहीं, प्रदोष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजे तक (लगभग 2 घंटे 13 मिनट)। इस समय शिव पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

दृक पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 11 मिनट तक, अमृत काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजित मुहूर्त नहीं हैै। हालांकि, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक (इस समय शुभ कार्य वर्जित)

यमगंड सुबह 7 बजकर 32 मिनट से 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। भद्रा रात 10 बजकर 31 मिनट से अगले दिन 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।

वहीं, पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

बुध प्रदोष व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, व्रत का संकल्प लें और शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, आक के फूल और सफेद चंदन चढ़ाएं। व्रत रखने से मानसिक शांति, बुद्धि की वृद्धि और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

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