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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:23 · नई दिल्ली संस्करण

शिक्षा प्रगति, सशक्तीकरण और सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला है : उपराष्ट्रपति

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई

दिल्ली । उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा कि

शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं है बल्कि यह प्रगति,

सशक्तीकरण और सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला है। धनखड़ दिल्ली विश्वविद्यालय

के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के 62वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित

कर रहे थे।

बदलाव के लिए शिक्षा को सबसे प्रभावशाली

परिवर्तनकारी तंत्र के रूप में रेखांकित करते हुए धनखड़ ने कहा कि शिक्षा

उस ताले की कुंजी है, जो प्रगति, समृद्धि और सशक्तिकरण के द्वार खोलती है।

शिक्षा सबसे बड़ा अधिकार और दान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से बड़ा कोई

मौलिक अधिकार नहीं हो सकता और शिक्षा से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता।

धनखड़

ने ज्ञान और शिक्षा के केंद्र के रूप में भारत की ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को

रेखांकित करते हुए कहा कि देश दृढ़ता से अपने पिछले गौरव को फिर से हासिल

करने की राह पर है। नालंदा और तक्षशिला जैसे संस्थानों की शानदार विरासत का

उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने समकालीन समय में भारत के शैक्षिक

परिदृश्य में आदर्श बदलाव और पुनरुत्थान पर प्रकाश डाला।

उन्होंने

आगे इस बात पर जोर दिया कि एसओएल ने उन लोगों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं,

जो पहले परिस्थितियों से असहाय थे। चंद्रयान मिशन से प्रेरणा लेते हुए,

जहां शुरुआती असफलताओं के बाद इसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आसानी से

लैंडिंग की, धनखड़ ने छात्रों से असफलता को सफलता की कुंजी मानने का आग्रह

किया। उन्होंने आधुनिक दुनिया की जटिलताओं से निपटने के लिए एक लचीली

मानसिकता की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 की एक

खासियत है जो हर छात्र और छात्रा को ध्यान में रखनी चाहिए। चंद्रयान-2 नहीं

होता तो चंद्रयान- 3 नहीं होता। चंद्रयान-2 पूरी तरह से सफल नहीं था, पर

काफी हद तक सफ़ल था। हर छात्र-छात्रा को ध्यान रखना चाहिए, विफलता किसी चीज

का नाम नहीं है। विफलता में आप सफलता की कुंजी देखो।”

भारतीय

शैक्षिक परिदृश्य में नई शिक्षा नीति (एनईपी) की महत्वपूर्ण भूमिका पर

प्रकाश डालते हुए धनखड़ ने कहा कि एनईपी एक परिवर्तनकारी बदलाव की शुरुआत

करता है, समग्र शिक्षार्थी विकास के लिए एक रोडमैप तैयार करता है और 21वीं

सदी की चुनौतियों के लिए सुसज्जित एक जानकार समाज का निर्माण करता है।

उन्होंने लचीले शिक्षण मार्गों, प्रौद्योगिकी एकीकरण, विविध आवश्यकताओं और

आकांक्षाओं को पहचानने पर एनईपी के जोर को रेखांकित किया।

उन्होंने

आगे विश्वास व्यक्त किया कि स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग जैसे संस्थान

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और लंबे समय से चली आ रही कमियों को

पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जैसा कि एनईपी द्वारा कल्पना की गई

है।

इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह, संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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