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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:55 · नई दिल्ली संस्करण

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू, सीएम धामी ने की घोषणा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू, सीएम धामी ने की घोषणा

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम' प्रभावी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को इसकी घोषणा की।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "आज से 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम' प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त हो गए हैं।"

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है जो आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण, जवाबदेह और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो। नई व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए समान एवं पारदर्शी मान्यता प्रणाली सुनिश्चित करेगी।

सीएम धामी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए। इसी लक्ष्य के साथ हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।"

बता दें कि 1 जुलाई से उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड पूरी तरह से समाप्त हो गया है। राज्य में बुधवार से नया राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आ गया है। उत्तराखंड राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शैक्षिक रूप से बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसमें यहां पर पढ़ने वाले बच्चे को एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम की किताबें मिलेंगी।

उत्तराखंड सरकार की ओर से पहले ही उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है। प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है; इसके अलावा, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिष्ठित विद्वानों और प्रोफेसरों को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।

सदस्यों में प्रोफेसर राकेश कुमार जैन, डॉ सैयद अली हामिद, प्रोफेसर पेमा तेनजिंग, प्रोफेसर गुरमीत सिंह, डॉ एल्बा मंड्रेले, प्रोफेसर रॉबिन अमन, चंद्रशेखर भट्ट, और राजेंद्र सिंह बिष्ट शामिल हैं।

महानिदेशक विद्यालय शिक्षा और निर्देशक एससीआरईटी को पदेन सदस्य बनाया गया है, जबकि निर्देशक अल्पसंख्यक कल्याण पदेन सदस्य सचिव की भूमिका में रहेंगे।

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