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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:56 · नई दिल्ली संस्करण

केरल विधानसभा में श्वेत पत्र पर हंगामा, सतीशन और पिनाराई विजयन के बीच हुई तीखी बहस

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
केरल विधानसभा में श्वेत पत्र पर हंगामा, सतीशन और पिनाराई विजयन के बीच हुई तीखी बहस

तिरुवनंतपुरम। केरल की वित्तीय स्थिति पर तैयार किए गए श्वेत पत्र को लेकर गुरुवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

विवाद तब शुरू हुआ, जब पिनाराई विजयन ने आरोप लगाया कि यह श्वेत पत्र वित्त विभाग ने तैयार नहीं किया है, बल्कि यह एक राजनीतिक दस्तावेज है। विजयन की यह टिप्पणी उस बयान के बाद आई, जिसमें मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा था कि पहले जारी किए गए कई श्वेत पत्रों में भी राजनीतिक पहलू शामिल रहे हैं।

विजयन ने कहा कि सरकार को यह उम्मीद करने का कोई अधिकार नहीं है कि विपक्ष भी उसी तरीके का पालन करे, जैसा वह करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्वेत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह आपकी नीति का पालन करने का मामला नहीं है। सवाल यह है कि क्या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।

इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के नेता को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयन की टिप्पणियां राजनीतिक हैं और उन्होंने श्वेत पत्र को पूरी तरह पढ़े बिना ही उसकी आलोचना कर दी।

वी.डी. सतीशन ने कहा, "विपक्ष के नेता ने पहले से ही अपनी राय बना ली है। हमारा काम करने का तरीका अलग है।" उन्होंने विजयन से श्वेत पत्र को पढ़ने की अपील की।

इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने भी श्वेत पत्र पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे तैयार करने के दौरान सरकारी दस्तावेज बाहरी लोगों के साथ साझा किए गए।

बालगोपाल ने कहा कि यह स्थापित प्रक्रियाओं के खिलाफ है और वित्तीय मामलों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों को इस तरह से संभाला नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग को अपने अधिकारियों से चर्चा कर स्वयं यह दस्तावेज तैयार करना चाहिए था और इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की।

इन आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी तरह की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं हुआ है और कोई भी गोपनीय दस्तावेज लीक नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, "ये सभी दस्तावेज पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। रिपोर्ट वित्त विभाग के नेतृत्व में तैयार की गई और मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी है। विश्लेषण के लिए केवल विशेषज्ञों की सहायता ली गई थी।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह श्वेत पत्र केरल की वित्तीय स्थिति का आकलन है, न कि कोई राजनीतिक दस्तावेज।

उन्होंने कहा, "हमारे सामने असली सवाल यह है कि केरल की आर्थिक स्थिति क्या है। पहले जारी किए गए कई श्वेत पत्रों में राजनीतिक बातें हो सकती हैं, लेकिन यह दस्तावेज राजनीतिक नहीं है।"

श्वेत पत्र को लेकर हुई यह तीखी बहस विधानसभा सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच पहली बड़ी टक्कर मानी जा रही है। इसने राज्य के वित्तीय संकट के मुद्दे को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

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