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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:18 · नई दिल्ली संस्करण

विश्वविद्यालयों को रैगिंग के खिलाफ उठाने होंगे सख्त कदम, नहीं तो होगी कार्रवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
विश्वविद्यालयों को रैगिंग के खिलाफ उठाने होंगे सख्त कदम, नहीं तो होगी कार्रवाई

नई दिल्ली। यूजीसी द्वारा देश भर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने का स्पष्ट निर्देश है। यूजीसी के मुताबिक देशभर के इन सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्ती से एंटी रैगिंग गाइडलाइंस लागू करना अनिवार्य है। दरअसल तय नियमों के दायरे में यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए कड़े नियम बनाए हैं।

यूजीसी के अनुसार देशभर के जो भी उच्च शिक्षण संस्थान इन नियमों को लागू करने में असफल रहे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी का कहना है कि किसी उच्च शिक्षा संस्थान में रैगिंग और आत्महत्या जैसा मामला सामने आना बेहद गंभीर है। ऐसे मामले में गहन जांच की जाएगी और संबंधित विश्वविद्यालय को इसके लिए समन किया जाएगा। यूजीसी के मुताबिक ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों को नेशनल एंटी रैगिंग मॉनिटरिंग कमिटी के सामने पेश होना होगा। यहां उनसे रैगिंग को लेकर प्रश्न किए जाएंगे जिनका स्पष्ट उत्तर देना अनिवार्य होगा। दरअसल, यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए व्यापक दिशा निर्देश तैयार किए हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने परिसर में ये नियम लागू करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि यूजीसी ने धर्मशाला स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज में एक छात्र की दुखद मृत्यु पर गंभीर संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्टों में रैगिंग के कारण आत्महत्या के आरोप सामने आने पर यूजीसी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन ने स्वत संज्ञान लिया और शिकायत दर्ज की है, जबकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सामान्य मृत्यु का है। फिलहाल मामले की पुलिस जांच जारी है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

रैगिंग रोकने के लिए बनाए गए नियमों के मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी रैगिंग कमिटी, एंटी रैगिंग स्क्वाड, एंटी रैगिंग सेल बनाना अनिवार्य है। यूजीसी का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के स्तर पर रैगिंग रोकने के लिए जवाबदेही भी तय की है। यूजीसी यह स्पष्ट कर चुका है कि विश्वविद्यालय को इस विषय में सतर्क रहने की आवश्यकता है।

यदि किसी विश्वविद्यालय के परिसर में रैगिंग की घटना होती है और जांच में सिद्ध होता है कि यूजीसी नियमों का उल्लंघन हुआ है तो ऐसे संस्थान के खिलाफ भी तुरंत व सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर जो उच्च शिक्षा संस्थान रैगिंग के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे उन संस्थानों के खिलाफ भी यूजीसी कठोर कार्रवाई करेगा। यूजीसी का स्पष्ट कहना है कि शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के लिए कोई स्थान नहीं है। कैंपस में रैगिंग एक अपराध है। यहां तक कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को कहा गया कि वे छात्रों और अभिभावकों से रैगिंग के खिलाफ ऑनलाइन अंडरटेकिंग लें। सभी छात्रों को बताया जाए कि किसी को भी शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना रैगिंग की श्रेणी में शामिल है।

यूजीसी ने कॉलेज से यह भी कहा है कि उनके परिसर में सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए। वहीं रैगिंग के खिलाफ जागरूकता के लिए कैंपस में एंटी-रैगिंग वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित किए जाएं। शिक्षण संस्थानों को हेल्पलाइन नंबर और मेल आईडी भी जारी करने को कहा गया। इसके साथ ही रैगिंग रोकने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी अनिवार्य है। यूजीसी के मुताबिक प्राप्त होने वाली प्रत्येक शिकायत की जांच करना विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के लिए अनिवार्य है। मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज से संबंधित शिकायत पर रेगुलेटरी बॉडी और काउंसिल को कमिटी बनाकर जांच करनी होगी।

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