दिल्ली में अमेरिकी नागरिक से लूट के आरोपी दो बदमाश मुठभेड़ में गिरफ्तार | भारत की "अतिथि देवो भवः" परंपरा की रक्षा में दिल्ली पुलिस का सख्त एक्शन

अमेरिकी नागरिक से लूटपाट करने वाले दो
बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तार | "अतिथि देवो भवः" की छवि को ठेस पहुंचाने वालों पर सख्त
कार्रवाई
नई दिल्ली, 30 जून 2025 — दुनिया
में "वसुधैव कुटुंबकम्" और "अतिथि देवो भवः" जैसे मूल्यों के
लिए पहचाने जाने वाले भारत में जब एक अमेरिकी नागरिक पर राजधानी दिल्ली में दो
युवकों ने चाकू से हमला कर लूटपाट की, तो
यह घटना देश की गरिमा पर एक प्रश्नचिह्न बन गई। लेकिन दिल्ली पुलिस ने मात्र तीन दिनों के भीतर मुठभेड़ के बाद दोनों
अपराधियों को गिरफ्तार कर
यह सिद्ध कर दिया कि भारत
अपने विदेशी मेहमानों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है।
यह वारदात 25/26 जून की मध्यरात्रि की है, जब 28
वर्षीय अमेरिकी नागरिक अराडोम बेला खान अपने मित्र के साथ
डीडीए आस्था कुंज पार्क, अमर कॉलोनी से गुजर रहे थे। तभी दो बदमाशों — जतिन उर्फ मोगली और अक्षय
— ने उन्हें चाकू से घायल कर दिया और उनका एप्पल मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। घायल अमेरिकी नागरिक को फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल लाया गया, और बाद में हाथ की सर्जरी के लिए अपोलो अस्पताल भेजा गया।
घटना की गंभीरता को समझते हुए दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने इंस्पेक्टर
राजेंद्र सिंह डागर के
नेतृत्व में एक स्पेशल टीम गठित की, जिसमें
SI शुभम चौधरी, SI मनेश,
SI विनोद, SI राजबीर, ASI अनिल,
HC महेंद्र व अन्य शामिल थे। तकनीकी और मानव खुफिया इनपुट के आधार पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और संदिग्ध इलाकों में
निगरानी शुरू की गई।
आख़िरकार 29 जून की सुबह, टीम
को सूचना मिली कि दोनों अपराधी आस्था कुंज पार्क के रास्ते कालकाजी की
ओर बढ़ रहे हैं। सुबह 5:10 बजे, पुलिस ने घेराबंदी की। लेकिन पुलिस के
आत्मसमर्पण के निर्देश को अनदेखा कर बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली इंस्पेक्टर डागर और दूसरी हेड कांस्टेबल महेंद्र की बुलेटप्रूफ
जैकेट पर
लगी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के पैरों में गोली मारी, जिससे
दोनों घायल हो गए और फिर पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
मुठभेड़ के बाद आरोपियों के पास से एक आधुनिक पिस्टल, एक
देशी कट्टा, तीन जिंदा कारतूस, एक मोबाइल फोन और फायरिंग के खाली खोखे बरामद किए गए। पुलिस ने घायल बदमाशों को
तुरंत एम्स
ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया,
जहां उनका इलाज चल रहा है।
पूछताछ में जतिन उर्फ मोगली और अक्षय ने कबूल किया कि वे पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ चुके
थे, नशे की लत में पड़ गए और जल्दी पैसे
कमाने की चाह में अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। जतिन पहले भी चाकूबाजी और लूट के दो मामलों में शामिल रह चुका है, जबकि
अक्षय का आपराधिक रिकॉर्ड अब तक साफ था।
इस वारदात से सिर्फ एक विदेशी नागरिक ही नहीं, बल्कि भारत की "अतिथि देवो भवः" की आत्मा भी घायल हुई थी। लेकिन दिल्ली पुलिस की तत्परता और
साहसिक कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि भारत मेहमानों का स्वागत करने वाला देश है, न कि उनका अपमान सहन करने वाला।
IPS अधिकारी ऐश्वर्या शर्मा,
एडिशनल डीसीपी, दक्षिण-पूर्व जिले ने कहा:
"भारत की छवि पर आंच डालने वालों को
बख्शा नहीं जाएगा। विदेशी मेहमानों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और दिल्ली
पुलिस इसके लिए विधिसम्मत एवं न्यायसंगत प्रयास करती रहेगी ।"





