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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

उत्तराखंड का त्रियुगीनारायण मंदिर: जहां तीन युगों से जल रही है शिव-पार्वती विवाह की अखंड धूनी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उत्तराखंड का त्रियुगीनारायण मंदिर: जहां तीन युगों से जल रही है शिव-पार्वती विवाह की अखंड धूनी

रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी गहरी आस्था और आध्यात्मिक विरासत के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां का हर तीर्थस्थल किसी न किसी पौराणिक कथा और चमत्कार से जुड़ा हुआ है। इन्हीं पवित्र स्थलों में एक बेहद खास और दिव्य स्थान है त्रियुगीनारायण मंदिर, जो रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का जीवंत प्रतीक भी है।

इस मंदिर की सबसे अनोखी और खास बात है यहां जलने वाली अखंड धूनी। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि तीन युगों से लगातार जल रही है। इसी वजह से इस स्थान का नाम 'त्रियुगीनारायण' पड़ा।

यह वही स्थान है जो तीन युगों से दिव्य अग्नि का साक्षी बना हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक अग्नि नहीं, बल्कि भगवान शिव और पार्वती की उपस्थिति का प्रतीक मानी जाती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार यही वह पवित्र भूमि है, जहां भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। कहा जाता है कि इस पावन विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई के रूप में कन्यादान किया था, जबकि ब्रह्मा ने इस विवाह की अग्नि प्रज्वलित की थी। माना जाता है कि वही विवाह अग्नि आज भी इस मंदिर में अखंड धूनी के रूप में जल रही है।

कहा जाता है कि श्रद्धालु धूनी की पवित्र राख अपने साथ ले जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस राख को घर में रखने से सुख-समृद्धि आती है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है। यही कारण है कि यहां आने वाले कई नवविवाहित जोड़े और विवाह के इच्छुक युवक-युवतियां भी इस पावन धाम में दर्शन करने जरूर आते हैं।

मंदिर के प्रांगण में 4 प्रमुख पवित्र कुंड (रुद्र कुंड, विष्णु कुंड, ब्रह्म कुंड और सरस्वती कुंड) हैं। मान्यता है कि इन कुंड़ों में स्नान करने से मन को शांति प्राप्त होती है।

चारों ओर से हिमालय की शांत और मनमोहक वादियों से घिरा यह मंदिर आज एक वेडिंग डेस्टिनेशन बन गया है। देश-दुनिया के कोने-कोने से यहां कपल शादी करने और नवविवाहित जोड़े आशीर्वाद लेने आते हैं।

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