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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

परीक्षाओं की पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता, गड़बड़ी पर सख्त एक्शन: साय

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
परीक्षाओं की पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता, गड़बड़ी पर सख्त एक्शन: साय

दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा : मुख्यमंत्री

विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सर्वोपरि, परीक्षाओं में गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस की नीति

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पूर्व सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। साथ ही प्रकरण में तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की तकनीकी जांच में साइबर सेल की भी सहायता ली जा रही है, ताकि प्रश्नपत्र के प्रसारण की पूरी कड़ी का पता लगाया जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। भर्ती हो या शैक्षणिक परीक्षा, उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है। इस मामले की पूरी तह तक जाकर जांच की जाएगी। प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया, किसने इसे प्रसारित किया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही, प्रत्येक तथ्य सामने लाया जाएगा। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी। प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित होने की शिकायत सामने आई थी। मामले की गंभीरता और परीक्षा की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है। निरस्त परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुनः आयोजित की जाएगी।

गठित जांच समिति द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में उपयोग किए गए मूल प्रश्नपत्र का मिलान करने के साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया, किन माध्यमों से आगे प्रसारित हुआ और इसकी पहुंच कहां तक रही। पुलिस एवं साइबर सेल द्वारा उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने संबंधित अधिकारियों को जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने और प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसी किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा, जिससे मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के हित प्रभावित हों।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा प्रारंभ होने तक की पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने को कहा गया है, ताकि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

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