अब तक अर्जुन मुंडा, विद्युतवरण महतो और जेपी पटेल ही झामुमो छोड़ने के बाद रहे सफल

अब तक अर्जुन मुंडा, विद्युतवरण महतो और जेपी पटेल ही झामुमो छोड़ने के बाद रहे सफल
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़कर दूसरे दलों में जानेवाले ज्यादातर नेताओं का राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल नहीं रहा चंद नाम जरूर हैं जो झामुमो से अलग रहकर भी अपनी पहचान बनाए रखा उसमें सबसे बड़ा नाम केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा का है। झामुमो से अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले अर्जुन मुंडा की गिनती आज भाजपा के दिग्गज आदिवासी नेताओं में होती है। 1995 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर खरसावां विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर बिहार विधानसभा पहुंचने वाले अर्जुन मुंडा भाजपा में जाने के बाद तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और केंद्र में भी आज मंत्री है।इसी तरह झामुमो छोड़ने के बाद भी विद्युत वरण महतो ने दो बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की।आज कांग्रेस में शामिल होने वाले भाजपा के सचेतक रहे जेपी पटेल झामुमो छोड़ने के बाद अपनी मांडू सीट बचाये रखा।मालुम हो की झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन की बड़ी बहू और जामा विधानसभा सीट से तीन बार से विधायक रहीं सीता सोरेन ने झामुमो छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। लोकसभा चुनाव से पहले सीता सोरेन का भाजपा में शामिल होने को झामुमो के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है
। झारखंड की राजनीति में अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा की बात करें तो पार्टी गठन के बाद से कई बार बड़े नेताओं ने झामुमो को छोड़ दिया लेकिन झामुमो से अलग रहकर ज्यादातर नेता राज्य की राजनीति में अपनी पहचान नहीं बना सके।





