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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

हरिद्वार का यह शिव मंदिर है बेहद खास, महादेव के क्रोध से जुड़ी है मान्यता

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हरिद्वार का यह शिव मंदिर है बेहद खास, महादेव के क्रोध से जुड़ी है मान्यता

हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखंड के कनखल में स्थित दक्षेश्वर महादेव का मंदिर बहुत ही खास है। इसे भगवान शिव का ससुराल भी कहा जाता है क्योंकि माता सती का मायका यहीं था। लोग मानते हैं कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने से हर मनोकामना जल्दी पूरी हो जाती है। यही वजह है कि साल भर देश-विदेश से भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव का विवाह माता सती से हुआ था, लेकिन राजा दक्ष इस शादी से खुश नहीं थे। उन्होंने अपने घर पर महायज्ञ का आयोजन किया, मगर भगवान शिव को उसमें निमंत्रण नहीं दिया। जब माता सती को यह पता चला, तो उन्होंने यज्ञ में जाने की इच्छा जताई। भगवान शिव पहले तो मना कर रहे थे, लेकिन आखिरकार माता सती को आज्ञा दे दी। यज्ञ में पहुंचकर माता सती ने देखा कि उनके पति का अपमान किया जा रहा है और क्रोध में आकर उन्होंने यज्ञ कुंड में अपनी आहुति दे दी।

यह देखकर भगवान शिव का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने अपने गण वीरभद्र और भद्रकाली को राजा दक्ष को सबक सिखाने के लिए भेजा। शिव के आदेश पर वीरभद्र और भद्रकाली ने राजा दक्ष का वध कर दिया। इस घटना से तीनों लोक में हाहाकार मच गया। बाद में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने जाकर भगवान शिव को शांत किया और राजा दक्ष को जीवनदान दिया। यही वजह है कि इस मंदिर को इच्छापूर्ति मंदिर भी कहा जाता है। यहां दर्शन करने से लोगों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है।

मंदिर का वातावरण बहुत ही पवित्र और शांत है। भक्त यहां आते हैं, दीपक जलाते हैं, फूल चढ़ाते हैं और भगवान शिव का ध्यान लगाते हैं। कहते हैं कि जो भी भक्त दिल से पूजा करता है, उसे कभी निराशा नहीं मिलती।

इस मंदिर की महिमा ऐसी है कि छोटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग, सभी यहां आते हैं। कोई अपने परिवार की खुशहाली के लिए आता है, कोई अपने करियर या स्वास्थ्य की इच्छा लेकर। हर कोई यहां से संतोष और शांति लेकर जाता है।

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