यह मनमोहन सिंह की सरकार नहीं, अब हम चुप नहीं बैठते”: संसद में गूंजा अमित शाह का तीखा प्रहार, कांग्रेस पर गंभीर आरोप

“यह मनमोहन सिंह की सरकार नहीं, अब हम चुप नहीं बैठते”: संसद में गूंजा अमित शाह का तीखा प्रहार, कांग्रेस पर गंभीर आरोप
नई दिल्ली, — संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार पर कड़े शब्दों में निशाना साधते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने हालिया पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में विपक्ष के सवालों पर करारा जवाब देते हुए कहा कि “कल विपक्ष पूछ रहा था कि पहलगाम के हमलावर कहां गए… मैं बता दूं कि जिन आतंकियों को आप के शासन में शरण मिली थी, उन्हें आज हमारी सरकार खोज-खोज कर खत्म कर रही है।”
गृह मंत्री ने सदन में ऐलान किया कि “अब तक 100 से अधिक आतंकियों को हमारी सेना ने ढेर किया है।” उन्होंने बताया कि 7 मई की रात 1:26 बजे हमारी सेना ने बड़ा ऑपरेशन पूरा किया, और यह कार्रवाई इतनी सटीक थी कि पाकिस्तान की नींद उड़ गई। अमित शाह ने कहा, “यह मनमोहन सिंह की सरकार नहीं है जो फाइलों में डोज़ियर भेजकर बैठ जाती थी… आज की सरकार जवाब देती है, और ज़मीन पर देती है।”
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि “9 मई को पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए गए… इनमें से 8 एयरबेस पर हमला इतना सटीक था कि पाकिस्तान का पूरा एयर डिफेंस सिस्टम हिल गया।” शाह के इस बयान ने न सिर्फ सदन में सनसनी फैला दी, बल्कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार की नकारात्मक और ढुलमुल नीति को एक बार फिर कठघरे में ला खड़ा किया।
कांग्रेस की सरकार पर तंज कसते हुए शाह ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर मनमोहन सिंह की सरकार दबाव में और डर के साए में काम करती थी, जबकि आज की मोदी सरकार निर्भीकता, निर्णायकता और राष्ट्रहित के सिद्धांत पर चलती है। उन्होंने विपक्ष को चेताते हुए कहा कि “आज आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है, और जो भी भारत की सरज़मीं को ललकारेगा, उसे जवाब गोली से मिलेगा, गोष्ठी से नहीं।”
अमित शाह का यह बयान कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की कमजोर विरासत को उजागर करता है, और मौजूदा सरकार की प्रखर राष्ट्रवादी रणनीति को मजबूती से सामने रखता है। संसद में यह भाषण भाजपा के लिए एक सशक्त राजनीतिक संकेत है, वहीं कांग्रेस के लिए एक तीखा सवाल – क्या डोज़ियर से देश की सुरक्षा होती है या निर्णायक कार्रवाई से?





