मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:33 · नई दिल्ली संस्करण

हजार स्तभों वाले मंदिर में एक छत के नीचे मौजूद हैं भगवान विष्णु, शिव और सूर्य; पोंगल पर लगता है भक्तों का तांता

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हजार स्तभों वाले मंदिर में एक छत के नीचे मौजूद हैं भगवान विष्णु, शिव और सूर्य; पोंगल पर लगता है भक्तों का तांता

नई दिल्ली। देश के अलग-अलग राज्यों में रहस्य और भक्ति से भरे कई मंदिर हैं, जहां भक्त अपने आराध्य के लिए मीलों चलकर आते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

भगवान शिव और भगवान विष्णु को दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा पूजा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक मंदिर ऐसा है, जहां भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ एक ही गर्भगृह में भगवान सूर्य भी विराजमान हैं? मकर संक्रांति (पोंगल) के मौके पर भक्त तीनों देवों के दर्शन के लिए आते हैं।

तेलंगाना राज्य के हनमकोंडा में हजार स्तभों वाला मंदिर मौजूद है, जिसे रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर को हजार स्तभों वाला मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि मंदिर स्तभों पर ही टिका है और मंदिर को सपोर्ट देने के लिए कोई दीवार नहीं है। मंदिर की बनावट ऐसी है कि कुछ स्तभों को सीधे तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन कुछ स्तंभ एक दूसरे से इस कदर चिपके हुए हैं कि उन्होंने लंबी दीवार का रूप ले लिया है।

मंदिर की हालत बहुत जर्जर थी, लेकिन सरकार के अधीन आते ही मंदिर की मरम्मत का काम जारी है और अब मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया है।

स्टार शेप की वास्तुकला में निर्मित, हजार स्तंभ मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है जहां लगभग हर दिन 1000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मंदिर में काले बेसाल्ट पत्थर से बनी एक विशाल नंदी प्रतिमा भी है। मंदिर में स्थित तीनों गर्भगृहों को सामूहिक रूप से त्रिकूटलयम के नाम से जाना जाता है।

गर्भगृह में भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ भगवान सूर्य भी विराजमान हैं। ये देश का पहला मंदिर है, जहां ब्रह्मांड को चलाने वाली तीन बड़ी शक्तियों को एक ही छत के नीचे देखा गया है।

भगवान सूर्य की प्रतिमा होने की वजह से मकर संक्रांति (पोंगल) पर भक्त सूर्य देव का आशीर्वाद लेने आते हैं। मंदिर में मकर संक्रांति (पोंगल) के अलावा, महा शिवरात्रि, कुंकुमा पूजा, कार्तिक पूर्णिमा, उगादी, नागुला चविती, गणेश चतुर्थी, बोनालु महोत्सव और बथुकम्मा महोत्सव भी धूमधाम से सेलिब्रेट किए जाते हैं।

12वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण रुद्र देव ने किया था। मंदिर में रुद्र देव के गृह देवता की प्रतिमा भी मौजूद है, जिसकी वजह से मंदिर को रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर चालुक्य मंदिरों की स्थापत्य शैली में निर्मित है। मंदिर के प्रांगण में मौजूद हाथी और विशाल नंदी महाराज की प्रतिमा को विशाल बेसाल्ट पत्थर से जाकर बनाया गया है। प्रतिमा पर बारीक नक्काशी भी देखने को मिलती है, जो नंदी महाराज की शोभा को बढ़ाती है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें