मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:48 · नई दिल्ली संस्करण

गोवर्धन परियोजना देश की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है: पीएम मोदी

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
गोवर्धन परियोजना देश की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है: पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय वाली राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना, गोवर्धन को मंजूरी दे दी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इसको लेकर जानकारी भी साझा की।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के हमारे सामूहिक सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम!

उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने गोवर्धन योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे संपीड़ित बायोगैस को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और घरेलू उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य है। यह योजना निवेश और नवाचार के लिए एक मजबूत और स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगी। इससे हमारे किसानों, सहकारी समितियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण उद्यमों को लाभ होगा, साथ ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। गोवर्धन परियोजना देश की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह देश के प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कृषि अवशेषों, गोबर, प्रेस मड (गन्ने की 'मैली'), नगरपालिका के जैविक कचरे और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद, ग्रामीण आय और राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करेगी।

यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू की जाएगी और संपीड़ित बायोगैस को देश के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख आधार स्थापित करेगी।

सुनिश्चित मांग, लाभकारी और स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण समर्थन और प्रौद्योगिकी विकास के माध्यम से, गोवर्धन देश के बायोगैस (सीबीजी) क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए आवश्यक मजबूत और पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करेगा।

इस योजना का उद्देश्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना और पूरे देश में एक जीवंत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।

पिछले कई वर्षों में, सरकार ने सतत वैकल्पिक किफायती परिवहन (सतत) पहल, जैविक खाद के लिए बाजार विकास सहायता (एमडीए) योजना, बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (बीएएम) योजना, पाइपलाइन अवसंरचना विकास (डीपीआई) योजना और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) के माध्यम से संपीड़ित बायोगैस क्षेत्र की नींव को व्यवस्थित रूप से मजबूत किया है।

इन सभी पहलों के सामूहिक प्रयास से 200 से अधिक संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों की स्थापना संभव हो पाई है, उत्पादन और निकासी प्रणालियां स्थापित हुई हैं, जैविक खाद मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है और विभिन्न फीडस्टॉक और भौगोलिक क्षेत्रों में सीबीजी की क्षमता का प्रदर्शन हुआ है।

अब गोवर्धन इस प्रगति को अगले स्तर पर ले जा रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रशासित यह योजना संपूर्ण सीबीजी मूल्य श्रृंखला में एक एकीकृत मंच तैयार करती है। इससे त्वरित कार्यान्वयन, बेहतर परियोजना अर्थशास्त्र और निवेशकों, ऋणदाताओं और विकासकर्ताओं के लिए अधिक निश्चितता सुनिश्चित होगी।

देश में परिवहन, घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। सीबीजी घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से इस बढ़ती मांग के एक बड़े हिस्से को पूरा कर सकता है। इससे ऊर्जा स्थिरता मजबूत होगी और आयातित परंपरागत ईंधन पर निर्भरता कम होगी।

संपीड़ित बायोगैस रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समतुल्य है और इसे मौजूदा गैस प्रणाली में आसानी से एकीकृत किया जा सकता है। इसलिए, यह नवीकरणीय ईंधन के लाभों को भारत के बढ़ते गैस अवसंरचना की पहुंच और उपयोगिता के साथ जोड़ता है।

प्रत्येक संपीड़ित बायोगैस संयंत्र कृषि अवशेषों, पशु गोबर और अन्य जैविक संसाधनों के इर्द-गिर्द एक स्थानीय चक्रीय अर्थव्यवस्था का निर्माण करता है। यह चारा आपूर्ति, परिवहन, संयंत्र संचालन और जैविक खाद उत्पादन में अवसर पैदा करता है, साथ ही स्वच्छ अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी का समर्थन करता है।

गोबरधन ने उत्पादकों के लिए एक विश्वसनीय और पूर्वानुमानित बाजार प्रदान करने के लिए एक समर्पित संपीड़ित बायोगैस ऑफटेक एश्योरेंस ढांचा स्थापित किया है। सिटी गैस वितरण संस्थाओं द्वारा की गई खरीद, सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) क्षेत्रों में वित्त वर्ष 2026-27 में अधिसूचित सीबीजी दायित्व के 3 प्रतिशत (3 प्रतिशत), वित्त वर्ष 2027-28 में 4 प्रतिशत (4 प्रतिशत) और वित्त वर्ष 2028-29 से आगे 5 प्रतिशत (5 प्रतिशत) के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें