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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:41 · नई दिल्ली संस्करण

सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक, पीएम मोदी ने बताया इसका महत्व

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक, पीएम मोदी ने बताया इसका महत्व

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन आयोजित इस बैठक में देशहित में कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ''आज युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नवनिर्मित सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की प्रथम बैठक हुई। इसमें देश के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए। इस दौरान, कैबिनेट ने ये संकल्प भी लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों के अनंत सामर्थ्य की बुनियाद पर बना सेवा तीर्थ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा। इस राष्ट्रयज्ञ में हमारा मंत्र है - यद् भद्रं तन्न आ सुव॥

अर्थात्, जो कुछ शुभ और कल्याणकारी है, जो भी नए विचार हैं, वो हमें अनवरत प्राप्त होते रहें।''

बैठक के दौरान मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों की सामर्थ्य पर आधारित ‘सेवा तीर्थ’ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा। इस अवसर पर वैदिक मंत्र ‘यद् भद्रं तन्न आ सुवः’ का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जो भी शुभ और कल्याणकारी विचार हों, वे निरंतर प्राप्त होते रहें।

‘सेवा तीर्थ’ को नए भारत के नवनिर्माण की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति बताया गया।

आजादी के बाद दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा। नया परिसर उन अस्थायी बैरकों की जगह बना है, जो ब्रिटिश काल में निर्मित थे। इसे गुलामी के प्रतीकों से आगे बढ़ते हुए आत्मविश्वासी और आधुनिक भारत के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्रिमंडल ने दोहराया कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा।

शासन की कार्य-संस्कृति संविधान के मूल्यों- गरिमा, समानता और न्याय के अनुरूप संचालित की जाएगी। पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बीते वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। आयुष्मान भारत के तहत करोड़ों नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली, जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से लगभग 80 करोड़ लोगों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाई गई। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ और 4 करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए गए। जल जीवन मिशन के माध्यम से 12 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंचाया गया।

मंत्रिमंडल ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र के साथ जीएसटी, डीबीटी और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों को पारदर्शी और प्रभावी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। लक्ष्य रखा गया कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की गति से भारत को निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया जाए।

बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा गया कि ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित नई कार्य-संस्कृति देश को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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