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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:42 · नई दिल्ली संस्करण

रुद्रनाथ धाम में होती है महादेव के 'मुख' की पूजा, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बयां की महिमा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
रुद्रनाथ धाम में होती है महादेव के 'मुख' की पूजा, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बयां की महिमा

उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा में गंगनचुंबी हिमालयी चोटियों के बीच रुद्रनाथ धाम में 'ॐ नमः शिवाय' की गूंज सुनाई देती है। सोमवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता के बारे में बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो शेयर किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, "चमोली जिले की मनमोहक घाटियों के बीच बसा भगवान शिव को समर्पित पवित्र रुद्रनाथ मंदिर, जिसे 'पंच केदार' में से चौथे केदार के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर श्रद्धा और भक्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की प्रशंसा करते हुए लिखा, "यहां महादेव के दिव्य 'मुख' स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है, जो इस पवित्र धाम को एक अद्वितीय धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है। चमोली जिले की अपनी यात्रा के दौरान इस पवित्र मंदिर के दर्शन अवश्य करें।"

यह मंदिर दुनिया की चकाचौंध से दूर आज भी सनातन संस्कृति की अदम्य आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की भव्यता को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आया करते हैं। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

समुद्र तल से लगभग 2,290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस प्राकृतिक चट्टानी मंदिर में भगवान शिव के मुखमंडल (एकासन) की पूजा की जाती है।

इस मंदिर का गर्भगृह एक प्राकृतिक गुफा के रूप में है। यहां भगवान शिव के केवल चेहरे की पूजा होती है, जिसे 'नीलकंठ महादेव' भी कहा जाता है।

मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग की स्थापना स्वयं पांडवों ने की थी। मंदिर के ठीक सामने नंदा देवी, नंदा घुंटी और त्रिशूल पर्वत की बर्फ से ढकी चोटियां दिखाई देती हैं।

वहीं, सर्दियों के मौसम में कपाट बंद होने के बाद, रुद्रनाथ की उत्सव डोली गोपेश्वर के गोपनीय मंदिर में स्थानांतरित कर दी जाती है और वहीं उनकी शीतकालीन पूजा होती है। आमतौर पर श्रद्धालु गोपेश्वर के पास स्थित 'सागर गांव' से पैदल यात्रा शुरू करते हैं। सागर गांव से मंदिर की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है, जिसे घने जंगलों और घास के मैदानों से होते हुए 2-3 दिन में पूरा किया जाता है।

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