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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:51 · नई दिल्ली संस्करण

रक्षा मंत्री ने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष से की मुलाकात, तीनों सेनाओं के प्रमुख भी रहे साथ

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
रक्षा मंत्री ने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष से की मुलाकात, तीनों सेनाओं के प्रमुख भी रहे साथ

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को रक्षा मंत्रालय, साउथ ब्लॉक में यूरोपीय आयोग की उच्च प्रतिनिधि एवं उपाध्यक्ष (एचआर) काजा कालास से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस महत्वपूर्ण चर्चा में भारतीय सशस्त्र बलों के प्रमुख यानी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चीफ भी शामिल रहे।

बैठक में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं। ये दोनों पक्षों के बीच लगातार सशक्त होते जा रहे साझेदारी संबंधों की आधारशिला हैं। भारत इन मूल्यों को वैश्विक स्थिरता, सतत विकास और समावेशी समृद्धि के लिए व्यावहारिक सहयोग में परिवर्तित करना चाहता है।

बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नई दिल्ली में काजा कालास से मुलाकात कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई।

उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय सुरक्षा एवं रक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। विशेष रूप से विश्वसनीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण, आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण तथा भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षमताओं के विकास में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होगी।

उन्होंने भारत-ईयू सहयोग को वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति भी रही। बैठक में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह तथा चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान (सीडीएस) भी शामिल हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय और यूरोपीय संघ के रक्षा उद्योगों को बड़े वैश्विक हित के लिए अपने प्रयासों का समन्वय करना चाहिए। यह सहयोग 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को मजबूती प्रदान करता है और साथ ही यूरोपीय संघ की रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के अनुरूप भी है।

वहीं काजा कालास ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में यूरोपीय संघ की उपस्थिति को गौरवपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को हिंद महासागर क्षेत्र में मिलकर कार्य करना चाहिए तथा संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीखना चाहिए।

वहीं रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना के सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर), गुरुग्राम में यूरोपीय संघ के एक संपर्क अधिकारी (लायजन ऑफिसर) की तैनाती के प्रस्ताव का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि आईएफसी-आईओआर में यूरोपीय संघ के संपर्क अधिकारी की तैनाती से समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और हिंद महासागर क्षेत्र में उभरते खतरों के आकलन में भारतीय नौसेना के साथ परिचालन समन्वय को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।

बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों पर भी विचार किया गया। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में आपसी विश्वास, सहयोग और दीर्घकालिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की।

गौरतलब है कि इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। वहीं इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपियन यूनियन का कंटीनेजेंट भी शामिल हुआ था। गणतंत्र दिवस परेड में कर्नल फ्रेडरिक साइमन स्प्रुइज्ट, यूरोपीय संघ सैन्य स्टाफ के महानिदेशक की ओर से यूरोपीय संघ के सैन्य प्रतिनिधित्व का नेतृत्व किया गया। वे एक औपचारिक समारोहिक जिप्सी पर सवार थे।

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