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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:41 · नई दिल्ली संस्करण

पूर्वी नागालैंड का दशकों से लंबित मुद्दा समझौते के साथ हल, पीएम मोदी ने बोले- लोगों के लिए खुलेंगे समृद्धि के रास्ते

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पूर्वी नागालैंड का दशकों से लंबित मुद्दा समझौते के साथ हल, पीएम मोदी ने बोले- लोगों के लिए खुलेंगे समृद्धि के रास्ते

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार, नगालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) के प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते की प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह सच में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो खासकर पूर्वी नागालैंड के विकास की राह को बेहतर बनाएगा। मुझे यकीन है कि यह लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा। यह नॉर्थईस्ट में शांति, प्रगति और सबके विकास के लिए हमारी पक्की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते की जानकारी दी और कहा कि भारत सरकार, नागालैंड सरकार और ईएनपीओ के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिससे पूर्वी नागालैंड के दशकों से चले आ रहे लंबित मुद्दे हल हो गए। उन्होंने बताया कि यह सभी विवादित मुद्दों को सुलझाकर शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के लिए प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बता दें कि ईएनपीओ नगालैंड के छह पूर्वी जिलों के आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है।

गृह मंत्री अमित शाह और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की मौजूदगी में गुरुवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से नगालैंड के छह जिलों (तुएनसांग, मोन, किफिरे, लॉन्गलेंग, नोकलाक और शमाटोर) के लिए फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) का गठन किया जाएगा। एफएनटीए को 46 विषयों के संबंध में शक्तियों का हस्तांतरण किया जाएगा।

यह समझौता एफएनटीए के लिए एक मिनी-सचिवालय के गठन का प्रावधान करता है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की ओर से किया जाएगा।

साथ ही, पूर्वी नगालैंड क्षेत्र के लिए विकास व्यय का आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में बंटवारा भी किया जाएगा। हालांकि, यह समझौता भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(ए) के प्रावधानों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करता है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता पूर्वोत्तर के लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी विवादास्पद मुद्दों को संवाद के माध्यम से हल करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को भी सिद्ध करता है कि समाधान केवल आपसी सम्मान व संवाद पर आधारित बातचीत से ही प्राप्त किए जा सकते हैं, न कि हिंसा और सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से।

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