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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:50 · नई दिल्ली संस्करण

देवभूमि की ऊंची चोटियों पर सजता है मां पूर्णागिरि का दरबार, दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे कष्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
देवभूमि की ऊंची चोटियों पर सजता है मां पूर्णागिरि का दरबार, दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे कष्ट

उत्तराखंड। आध्यात्मिक रहस्यों को अपने आंचल में समेटे देवभूमि उत्तराखंड की महिमा अपरंपार है। इन्हीं पवित्र केंद्रों में से एक, चंपावत जिले के टनकपुर में हिमालय की ऊंची चोटियों पर विराजमान 'मां पूर्णागिरी मंदिर' करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। यह मंदिर अपने पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है। इसी क्रम में, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से मंदिर की महिमा का बखान किया।

सीएम धामी ने मंदिर का एक भव्य वीडियो साझा करते हुए इसके आध्यात्मिक वैभव को रेखांकित किया। उन्होंने अपनी पोस्ट के जरिए मां के दरबार की अलौकिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को यहां आने के लिए आमंत्रित किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित मां पूर्णागिरि मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख स्थान है।

यहां पूरे साल देश के अलग-अलग राज्यों से भक्त माता के दर्शन करने आते हैं। खासकर नवरात्र के समय यहां विशेष पूजा-अर्चना और बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। अगर आप देवभूमि उत्तराखंड जाएं, तो मां पूर्णागिरि के दर्शन जरूर करें और इस पवित्र स्थान का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करें।

मां पूर्णागिरी का यह पावन धाम आध्यात्मिक ऊर्जा का एक ऐसा स्त्रोत है, जहां पहुंचकर हर भक्त खुद को धन्य और सकारात्मक महसूस करता है। माता रानी का यह दरबार अपने साथ भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता समेटे हुए है।

मान्यता है कि यह मंदिर 108 सिद्धपीठों में से एक अत्यंत पवित्र शक्तिपीठ है। समुद्र तल से लगभग 3000-5500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर देवी सती की नाभि गिरने का स्थान माना जाता है, जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।

यहां पर श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए चुनरी की गांठ बांधते हैं। पूर्णागिरि दर्शन के बाद श्रद्धालु पास के सिद्ध बाबा मंदिर भी जाते हैं। मान्यता है कि उनके बिना दर्शन के पूर्णागिरि यात्रा अधूरी मानी जाती है। इस मंदिर के पास ही बुराम देव मंडी स्थित है जो पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है।

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