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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

साल 2026 की शुरुआत नेवी के लिए बेहद खास, पहले तीन महीनों में दो वॉरशिप मिलेंगे

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
साल 2026 की शुरुआत नेवी के लिए बेहद खास, पहले तीन महीनों में दो वॉरशिप मिलेंगे

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना नीले समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक के बाद एक स्वदेशी वॉरशिप शामिल कर रही है। 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की तैयारी तेज है। नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म लगातार नेवी में शामिल किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में साल 2026 के पहले तीन महीनों में दो वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जाएंगे। नेवी के लिए साल 2025 की शुरुआत भी धमाकेदार रही थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सबमरीन और दो वॉरशिप को नौसेना में शामिल किया था। इसमें प्रोजेक्ट 17ए के नीलगिरी क्लास का गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी शामिल था। अब उसी नीलगिरी क्लास का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि नौसेना में शामिल होने जा रहा है।

अगले महीने यानी 14 मार्च को विशाखापत्तनम में यह आधिकारिक तौर पर नेवी का हिस्सा बन जाएगा। वहीं, 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नेवी में शामिल किया गया था। इसी क्रम में हिमगिरि और उदयगिरि को भी शामिल किया जा चुका है। अब तारागिरि की बारी है। गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरि ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है, जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वॉरफेयर में बेहद सक्षम है। एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बराक-8 और एयर डिफेंस गन लगी हैं।

एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर भी मौजूद हैं।

यह फ्रिगेट लंबी दूरी से आने वाले हमलों को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है। इसमें हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जहां दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट्स में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं। 6,700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से चार मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए जा रहे हैं।

साल 2019 से 2022 के बीच एमडीएल और जीआरएसई इनका लॉन्च कर चुके थे। तारागिरि नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो नेवी में शामिल होने जा रहा है। बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं। इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स के नौसेना में शामिल होने के बाद भारत की समुद्री ताकत में जबरदस्त इजाफा होगा।

नीलगिरी क्लास के सभी वॉरशिप का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है। प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट्स के नाम भारत की पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

चीन और पाकिस्तान की सबमरीन से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना पर काम तेज कर दिया है।

पहले तीन एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट-आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त और आईएनएस माहे- पहले ही नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं।

आईएनएस ‘अंजदीप’ की खासियत यह है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, एएसडब्ल्यू कॉम्बैट सूट, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। यह 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है और एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। साल 2019 में 16 एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए थे। इनमें से 8 कोचिन शिपयार्ड में और 8 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता में बनाए जा रहे हैं।

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