भारतीय मजदूर संघ का 70वां वर्षगांठ समारोह बना वैचारिक चेतना और संगठनात्मक प्रतिबद्धता का प्रतीक

भारतीय मजदूर संघ का 70वां वर्षगांठ समारोह बना वैचारिक चेतना और संगठनात्मक प्रतिबद्धता का प्रतीक
नई दिल्ली, 23 जुलाई 2025 – देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने अपने 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्षभर आयोजित आयोजनों की श्रृंखला का भव्य समापन समारोह आज नई दिल्ली के के.डी. जाधव कुश्ती हॉल, इंदिरा गांधी स्टेडियम में सम्पन्न किया। यह आयोजन न केवल संगठन की उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि श्रमिक हितों के प्रति उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय योगदान की ऐतिहासिक गवाही भी बना।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडविया उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता BMS के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिरणमय पांडेय ने की। कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली प्रांत BMS की अध्यक्ष इन्दु जम्वाल के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने दिल्ली में आयोजित हुए संगठन के पहले अधिवेशन (1970) से लेकर आज तक की यात्रा को कार्यकर्ताओं के लिए गौरवपूर्ण बताया।
अखिल भारतीय महामंत्री रविन्द्र हिम्मते ने वर्षभर चले आयोजनों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 23 जुलाई 2024 को भोपाल से प्रारंभ हुई यह वर्षगांठ यात्रा संगठन के मूल सिद्धांतों – राष्ट्रीयता, उद्योगहित और श्रमिक कल्याण – पर आधारित रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समापन किसी अंत का संकेत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत है।
BMS अध्यक्ष हिरणमय पांडेय ने संगठन की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि 1989 से पूर्व मजदूर संघ देश का दूसरा सबसे बड़ा संगठन था, लेकिन तब से आज तक यह शीर्ष पर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन ने युवा और महिलाओं को नेतृत्व प्रदान कर देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। G20 के अंतर्गत L20 समूह में भी BMS ने भारतीय श्रमिक दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत किया है। आज यह संगठन 28 राज्यों, 44 महासंघों और 6630 संगठनों के माध्यम से सक्रिय रूप से काम कर रहा है। नेपाल में भी संगठन की उपस्थिति इसके वैश्विक विस्तार का संकेत है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री वीर भगाये ने कहा कि यह समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वैचारिक आंदोलन की अभिव्यक्ति है, जो अब समाज का आयोजन बन चुका है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडविया ने भारतीय मजदूर संघ की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संगठन केवल आंदोलनों का नेतृत्व नहीं करता, बल्कि प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा कि बीएमएस आज न केवल भारत का, बल्कि विश्व का भी एक महत्वपूर्ण श्रमिक संगठन बन चुका है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हो रहा है।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. मोहन भागवत ने संगठन को आत्म-निरीक्षण का संदेश देते हुए कहा कि यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि मूल्यांकन और दिशा निर्धारण का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि बीएमएस को अब विश्व को एक नया श्रमिक मॉडल देने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। संगठन की प्रतिष्ठा उस पहली पीढ़ी के समर्पण, दूसरी पीढ़ी के विस्तार, और तीसरी-चौथी पीढ़ी की चेतना पर आधारित है, जिसे आगे भी बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जब BMS के पास आता है तो वह लाभार्थी नहीं, ध्येयार्थी बनकर जाता है — यही संगठन की आत्मा है।
इस अवसर पर ‘ई-कार्यकर्ता’ ऐप की भी शुरुआत की गई, जो संगठन के कार्यकर्ताओं को तकनीकी रूप से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल है। साथ ही BMS की 70 वर्ष की यात्रा पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन हुआ और ऑर्गनाइज़र साप्ताहिक पत्रिका का विशेष संस्करण विमोचित किया गया।
इस ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों, BMS के विभिन्न प्रांतों के प्रतिनिधियों, फेडरेशन लीडर्स, कार्यकारिणी सदस्यों, नेपाल से आए प्रतिनिधियों, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अन्य मंत्रियों और दिल्ली-एनसीआर से हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित हज़ारों कार्यकर्ताओं ने श्रमिक हित, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु अपने संकल्प को दोहराया।
यह आयोजन भारतीय मजदूर संघ की सात दशकों की संघर्षशील, सशक्त और वैचारिक यात्रा का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया एक ऐसा संगठन जिसने श्रमिकों की आवाज़ को गरिमा, नेतृत्व और दिशा दी है।





