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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

म मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामला, सुनवाई जुलाई तक टली

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
म मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामला, सुनवाई जुलाई तक टली

नई दिल्ली। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा में कथित गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही सुना जाएगा।

यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दाखिल की गई है। इसमें मांग की गई है कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासन और वित्तीय गतिविधियों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने किसी भी आपराधिक मामले को दर्ज किए बिना जांच शुरू कर दी है, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। उल्लेखनीय है कि 13 जून को कथित चढ़ावे से जुड़ी चोरी के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया था।

इस एसआईटी ने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

सुप्रीम कोर्ट में जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि इसमें इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित कामकाज शुरू होने पर होती है तो इससे कोई असाधारण स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस याचिका पर 12 से 17 जुलाई के सप्ताह में विचार किया जाएगा। इस मामले को लेकर याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि आरोप गंभीर हैं और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को तत्काल सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।

बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया है जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बयान भी जरूरत पड़ने पर दर्ज किए जा सकते हैं। चंपत राय ने बीते दिनों ट्रस्ट से इस्तीफा दिया था।

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