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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:24 · नई दिल्ली संस्करण

ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, दान और जप से चमकेगी किस्मत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, दान और जप से चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली। ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शनिवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया दान, जप, और व्रत अन्य पूर्णिमाओं की तुलना में कई गुना अधिक कल्याणकारी माना जाता है।

पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि अधिकमास का आगमन हर तीन साल में केवल एक बार होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, शनिवार के दिन सूर्य वृषभ राशि में और चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे।

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।

अधिकमास की पूर्णिमा 'सर्वसिद्धिदायिनी' होती है यानी कि यह हर तरह की मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाली है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर व्रत रखने, पवित्र नदियों में स्नान करने और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करने से साधक को सामान्य दिनों के मुकाबले कई हजार गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

यह तिथि भगवान नारायण (विष्णु) को समर्पित है। इस दिन उपवास रखने और सत्यनारायण कथा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस दिन विशेष पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म स्नान (हो सके, तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें) आदि करने के बाद स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण कर घर के मंदिर पर गंगाजल का छिड़काव कर वहां एक चौकी रखें, जिस पर पीला या फिर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अब श्री हरि को फूल, फल, चंदन, अक्षत और धूप-दीप और भोग में तुलसी पत्ति जरूर शामिल करें। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें। साथ ही 'विष्णु सहस्रनाम' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।

ज्येष्ठ का महीना होने के कारण गर्मी बहुत होती है, इसलिए अधिकमास की पूर्णिमा पर जल से भरी मटकी (घड़ा), सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र या अन्न का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर दें।

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