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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:27 · नई दिल्ली संस्करण

स्थिरता एक आवश्यकता है, अब एक नारा नहीं: राष्ट्रपति

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
स्थिरता एक आवश्यकता है, अब एक नारा नहीं: राष्ट्रपति

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को कहा कि दुनिया जलवायु परिवर्तन के संकट का सामना कर रही है। स्थिरता अब एक नारा नहीं है, यह एक आवश्यकता बन गई है। लेखांकन की प्रथा का भारत में एक लंबा इतिहास है। लेखांकन और जवाबदेही गहराई से जुड़े हुए हैं।राष्ट्रपति सचिवालय के एक बयान के मुताबिक राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्‍ली में भारतीय लागत लेखाकार संस्थान के 12वें राष्ट्रीय छात्रों के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे इतिहास में लेखांकन और जवाबदेही का घनिष्ठ संबंध होने के कारण लेखाकारों को समाज में उच्च सम्मान प्राप्त है। हम जवाबदेही को महत्व देते हैं, इसलिए लेखांकन को विशेष महत्व देते हैं।उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में इस समृद्ध विरासत को अन्य संस्थाओं के अलावा भारतीय लागत लेखाकार संस्थान ने आगे बढ़ाया जा रहा है। इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1944 में देश में लागत और प्रबंधन लेखाकारों के विनियमन और विकास के लिए की गई थी और स्वतंत्रता के बाद यह न केवल आर्थिक परिवर्तन का साक्षी है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को आज दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।उन्‍होंने कहा कि भारतीय लागत लेखाकार संस्थान देश की प्रगति में भागीदार रहा है। यह नीति निर्माताओं, केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ विभिन्न संगठनों को लागत-कुशल रणनीतियां, प्रणालियां विकसित करने में अत्यधिक मूल्यवान सहायता प्रदान करता है और इस संस्थान ने अपने कार्यों को कारखानों में लागत लेखांकन से लेकर प्रबंधन लेखांकन तक बढ़ते देखा है। राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है और स्थिरता अब एक आवश्यकता बन गई है।उन्होंने कहा कि अब कॉर्पोरेट संगठनों को केवल लाभ के उद्देश्य से काम करने के अलावा पर्यावरण की लागत को भी ध्यान में रखना होगा तथा भारतीय लागत लेखाकार संस्थान अपने कौशल से इस दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। राष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां वित्तीय लेखांकन से कहीं अधिक है और लागत लेखाकार के रूप में वे वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में योगदान देने के लिए अद्वितीय स्थिति में हैं। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान द्वारा दी जाने वाली शिक्षा छात्रों को न केवल एक सफल पेशेवर बल्कि राष्ट्र-निर्माता भी बनाएगी।

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