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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:00 · नई दिल्ली संस्करण

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमनाथ मंदिर पर प्रधानमंत्री मोदी के लेख की प्रशंसा की

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमनाथ मंदिर पर प्रधानमंत्री मोदी के लेख की प्रशंसा की

नई दिल्ली। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेख की सराहना की है। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले मंदिर को तोड़ने का प्रथम प्रयास किया गया था। आज भी मंदिर अडिग है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पीड़ा, संवेदना और भावनाओं को व्यक्त किया है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा, "प्रधानमंत्री मोदी का ब्लॉग उस पीड़ा को लेकर था जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया गया था। महमूद गजनवी ने अपनी सेना के साथ मंदिर को नुकसान पहुंचाया था। मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं को क्षति पहुंचाई थी। वह सोचता था कि मंदिर और मूर्ति तोड़ने से सब खंडित हो जाएगा।

एक हजार साल पहले यह कोशिश हुई थी।"

उन्होंने कहा, "देश के प्रधानमंत्री ने अपने ब्लॉग के जरिए संदेश दिया है कि तुम मंदिर और मूर्ति तोड़ सकते हो, लेकिन सोमनाथ को नहीं तोड़ सकते हो। एक हजार साल बीत चुका है, सोमनाथ वहीं है। तुम (गजनवी) आए और चले गए। इसलिए भविष्य में भी इस तरह की कोशिश न करें।" शंकराचार्य ने कहा कि पीएम मोदी का यह संदेश स्वागत योग्य कदम है।

इसी बीच, अविमुक्तेश्वरानंद ने मांग की कि देश में जहां भी गजनवी का नाम है, वहां से उसे हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गजनवी ने निश्चित रूप से अच्छा काम नहीं किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व- अटूट आस्था के 1,000 वर्ष' शीर्षक के साथ सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले को लेकर लेख लिखा। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया।

पीएम मोदी ने लिखा, "1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है।

जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं। ये ऐसा दुख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है।"

उन्होंने लिखा, "एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुनः निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था।

तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वह समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।"

इस लेख के बाद सोमनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहितों और सोमपुरा ब्राह्मण समुदाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि एक हजार साल पहले सोमनाथ की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को स्मरण करना सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

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