मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:32 · नई दिल्ली संस्करण

16 मई को शनि जन्मोत्सव और वट सावित्री व्रत, जानें शुभ-अशुभ समय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
16 मई को शनि जन्मोत्सव और वट सावित्री व्रत, जानें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली। 16 मई को सनातन धर्म में खास महत्व का दिन है। इस दिन वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एक साथ मनाया जाएगा। ज्येष्ठ कृष्ण की अमावस्या को पड़ने वाले वट सावित्री व्रत को विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख और स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। वहीं, सूर्य पुत्र शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा, हवन और तेलाभिषेक का विशेष महत्व है।

पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस दिलाने के लिए बुद्धि और भक्ति का परिचय दिया था। इसी वजह से महिलाएं वट (बरगद) के पेड़ की पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं। शनि जयंती पर शनि दोष, साढ़े साती आदि से बचाव के लिए शनि शांति पूजा और तेलाभिषेक किया जाता है।

वहीं, व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की जड़ में जल, फूल, चावल, फल आदि चढ़ाकर पूजा करती हैं, जिसका विशेष महत्व है। शनि भक्त काले तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएं दान कर सकते हैं।

धर्मशास्त्रों के अनुसार इन व्रतों और पूजाओं से पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

दृक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 17 मई की देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय 5 बजकर 30 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 5 मिनट पर होगा।

शनि जन्मोत्सव और वट सावित्री व्रत पर शुभ मुहूर्त व योग की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 7 मिनट से 4 बजकर 48 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।

वहीं, अमृत काल दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से 2 बजकर 40 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 4 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 8 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 42 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक, दुर्मुहूर्त सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट और 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। 16 मई को पूरे दिन आडल योग रहेगा।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें