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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:22 · नई दिल्ली संस्करण

एसईसीएल कुसमुंडा में 2100 करोड़ के कथित कोयला घोटाले की सीबीआई जांच की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एसईसीएल कुसमुंडा में 2100 करोड़ के कथित कोयला घोटाले की सीबीआई जांच की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

कोरबा। गैर-राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने कोरबा जिले में कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम आज ज्ञापन सौंपते हुए दो गंभीर मामलों में केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने एसईसीएल कुसमुंडा में 70 लाख टन कोयले की कथित हेराफेरी और बलरामपुर जिले में अफीम की अवैध खेती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।संगठन ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में करीब 70 लाख टन कोयले की हेराफेरी हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन की प्रति केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को भी भेजी गई है। संगठन ने कहा कि यदि इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी और संसाधनों की रक्षा के लिए संगठन लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के खनिज संसाधनों की लूट हो रही है और बलरामपुर में अफीम की अवैध खेती समाज और युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि दोनों मामलों की सीबीआई जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।जिला संयोजक अतुल दास महंत ने कहा कि 70 लाख टन कोयले की हेराफेरी छत्तीसगढ़ की संपत्ति की लूट है और अफीम की खेती से आने वाली पीढ़ी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।इस दौरान प्रदेश आरटीआई प्रमुख जितेंद्र साहू, जिला अध्यक्ष एलएक्स टोप्पो, जिला सचिव विनोद सारथी, जिला सह सचिव बसंत महंत, जिला संगठन मंत्री राजेश साहू, जिला मीडिया प्रभारी कन्हैया सुंदर, भू-स्थापित अशोक पटेल और खड़ प्रभारी गोविंद सारथी सहित संगठन के कई पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के हितों और संसाधनों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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