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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:18 · नई दिल्ली संस्करण

सम्राट चौधरी का सियासी कद बिहार में लगातार मजबूत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सम्राट चौधरी का सियासी कद बिहार में लगातार मजबूत

पटना। बिहार में भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नेता चुने जाने के बाद यह तय है कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री वही होंगे।

विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्राट चौधरी के नेता चुने जाने की घोषणा की। भले ही सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राजद से की हो, लेकिन भाजपा ने उन्हें सब कुछ दिया जो एक आम राजनीतिक कार्यकर्ता की इच्छा होती है।

सम्राट चौधरी अपने बचपन से ही राजनीति को करीब से देखा है।

उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार में राजद के बड़े नेता रहे हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं और माता पार्वती देवी तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी भी मुंगेर के तारापुर से विजयी हुए। भाजपा से पहले वे राजद और जदयू में भी रह चुके हैं।

सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और 19 मई 1999 को बिहार सरकार में कृषि मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने 2000 और 2010 में परबत्ता (विधानसभा क्षेत्र) से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए। 2010 में, उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्षी दल का मुख्य सचेतक बनाया गया।

वहीं, वर्ष 2018 से उनकी पहचान भाजपा नेता के रूप में है। 2019 में जब नित्यानंद राय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तो सम्राट चौधरी को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद भाजपा में वे कद्दावर नेता बने।

जब नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़कर राजद के साथ महागठबंधन सरकार बनाई थी, तब सम्राट चौधरी को बड़ी सियासी पहचान मिली।

सम्राट चौधरी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने। उन्होंने उस दिन नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद ही मुरैठा (पगड़ी) खोलने की बात कहकर सिर पर मुरैठा बांध ली।

साल 2023 में सम्राट चौधरी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने, और इसके बाद जब नीतीश कुमार दोबारा से एनडीए में वापसी की, तो वे उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो गए। 2025 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष के निशाने पर सबसे ज्यादा सम्राट चौधरी रहेंगे।

इस चुनाव के बाद एनडीए की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें उप मुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी। ऐसा पहली बार हुआ था जब नीतीश कुमार ने सीएम रहते गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी छोड़ी थी।

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