बिहार में नियोजित शिक्षकों के सक्षमता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता पर मचा बवाल

सक्षमता परीक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे शिक्षक
पटना। बिहार में नियोजित शिक्षकों के सक्षमता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता पर बवाल मच गया है। नियोजित शिक्षक हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। प्रदेश के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षक सड़क पर फिर उतर सकते हैं।
शिक्षा विभाग के अपर प्रमुख सचिव केके पाठक ने नियोजित शिक्षकों के लिए शनिवार को एक नया आदेश जारी किया गया था। इसमें यह कहा गया है कि अगर नियोजित शिक्षक तीन बार ली जाने वाली सक्षमता परीक्षा में नहीं बैठते हैं, तो इन्हें अपने नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। नौकरी बची रहे इसके लिए एक बार पास होना जरूरी है। केके पाठक के इस आदेश के बाद शिक्षक संघ ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। शिक्षक संघ के नेता राजू सिंह का कहा कहना है कि शिक्षा विभाग का यह फैसला शिक्षक नियोजन नियमावली के उलट है। राजू सिंह ने कहा कि विभाग और सरकार के इस आदेश को हम लोग हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
बता दें बिहार में नियोजित शिक्षकों की संख्या करीब साढ़े तीन लाख है। दो दिन पहले यानी 1 फरवरी को सक्षमता परीक्षा को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया था। इसका अध्यक्ष केके पाठक को बनाया गया है। इस कमेटी में इरएइ के अध्यक्ष आनंद किशोर, सज्जन आर.(निदेशक, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद), कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव (निदेशक, प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा) शामिल होंगे। सक्षमता परीक्षा में फेल होने वाले या एग्जाम में शामिल नहीं होने वाले उन अभ्यर्थियों को लेकर कमेटी विचार करेगी। विचार करने के बाद कमेटी हफ्ते भर में अपनी अनुशंसा राज्य सरकार को सौंपेगी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की ओर इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।





