ग्राहकों के अधिकारों की क्रांति: 'अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत' का संघनिष्ठ और राष्ट्रवादी अभियान

ग्राहकों के
अधिकारों की क्रांति: 'अखिल भारतीय
ग्राहक पंचायत' का संघनिष्ठ और
राष्ट्रवादी अभियान
उपभोक्ता का अधिकार, राष्ट्र का आधार
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2025 — आधुनिक लोकतंत्र में जहां हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में
उपभोक्ता है, वहीं उपभोक्ता
अधिकारों की उपेक्षा एक गहन सामाजिक समस्या बनती जा रही है। इस समस्या का स्थायी
समाधान तभी संभव है जब ग्राहक संगठित हो, जागरूक हो और अपने अधिकारों के लिए निडर होकर संघर्ष करे।
इसी लक्ष्य के साथ देश में एक ऐसा संगठन पिछले पाँच दशकों से सक्रिय है, जिसने उपभोक्ता को न केवल अधिकारों के
प्रति सजग किया है, बल्कि राष्ट्र
निर्माण की विचारधारा से भी जोड़ा है — और वह है ‘अखिल भारतीय
ग्राहक पंचायत’ (ABGP)।
स्थापना: RSS प्रचारक की दूरदृष्टि से जन्मी एक क्रांति
1974 में पुणे की धरती
पर इस संगठन की नींव एक स्वप्नदृष्टा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक श्री बिंदु माधव जोशी (प्रसिद्ध रूप से ‘नाना जोशी’) ने रखी थी।
प्रारंभ में इसका नाम “युवक महामंडल जनता
ग्राहक संघ” था। उद्देश्य था त्योहारी सीजन में बढ़ती मुनाफाखोरी, महंगे वस्त्र और शोषण के विरुद्ध आवाज़
उठाना।
उन्होंने यह
स्पष्ट रूप से कहा था कि ग्राहक केवल एक लेन-देन करने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र का सबसे बड़ा जागरूक
नागरिक है। यह वही समय था जब देश में सामाजिक आंदोलनों की नई लहर उठ रही थी — और ग्राहक पंचायत भी उसी चेतना की उपज
बनकर उभरी।
संगठन का औपचारिक आरंभ: न्यायमूर्ति चागला के शब्दों में
भारत का भविष्य
23 दिसंबर 1975 को पुणे में इसका औपचारिक उद्घाटन न्यायमूर्ति
एम.सी. चागला के हाथों हुआ।
उन्होंने कहा, "आज पुणे ने जो
सोचा है, वह कल भारत
सोचेगा।" यह भविष्यवाणी
सत्य सिद्ध हुई। ग्राहक पंचायत ने धीरे-धीरे पूरे भारत में उपभोक्ता अधिकारों की
एक मजबूत और संगठित आवाज़ के रूप में पहचान बनाई।
RSS से गहरा संबंध: वैचारिक जुड़ाव और
सांगठनिक विस्तार
‘अखिल भारतीय
ग्राहक पंचायत’ की कार्यशैली, संगठनात्मक अनुशासन और सेवा-भावना पूरी
तरह RSS की प्रेरणा से
पोषित रही है। संघ के प्रचारकों ने विभिन्न राज्यों में इस संगठन को स्थापित करने
में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि संगठन ने औपचारिक रूप से प्रशासनिक स्वतंत्रता
बनाई रखी, लेकिन उसकी
वैचारिक जड़ें, कार्यनीति, और राष्ट्रहित में प्रतिबद्धता संघ की
परंपराओं से अनुप्राणित रही हैं।
संगठन ने अपने
प्रतीक चिह्न ‘गरुड़’ और नाम को विधिक रूप से पंजीकृत कराया ताकि इसकी पहचान
राष्ट्रनिष्ठ, पारदर्शी और
निष्कलंक बनी रहे। इसका ध्येयवाक्य रहा: "ग्राहक ही राष्ट्र
का आधार है।"
ग्राहकों के लिए संघर्ष: न्याय से नीति तक की लड़ाई
ABGP का उद्देश्य केवल
शिकायतें दर्ज करवाना नहीं, बल्कि एक सजग
उपभोक्ता समाज का निर्माण करना है। संगठन ने बार-बार यह अपील की है कि ग्राहक पहले
उपभोक्ता फोरम और सरकारी हेल्पलाइनों (जैसे CM Helpline) का उपयोग करें, लेकिन यदि वहां से भी न्याय न मिले, तो ABGP उनके लिए कानूनी, सामाजिक और जनचेतना के स्तर पर संघर्ष करेगा।
इस संगठन की
भागीदारी ने उपभोक्ता संरक्षण
अधिनियम 1986 के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और 2019 के संशोधन में भी इसकी सक्रिय भागीदारी रही। इसके कार्यकर्ताओं ने
देशभर में जनजागरण, प्रशिक्षण, परिसंवाद, कानूनी सलाह शिविर, और डिजिटल शिक्षा के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को सशक्त
किया।
महिला शक्ति और ग्रामीण भारत में प्रभाव
ABGP ने विशेष रूप से
ग्रामीण भारत में महिलाओं को उपभोक्ता अधिकारों के लिए संगठित किया। मोबाइल ऐप, डिजिटल सदस्यता और गाँव-स्तर की समितियों
के माध्यम से यह संगठन घर-घर पहुंचा है। महिलाओं ने भी इस आंदोलन को नेतृत्व
प्रदान किया, जिससे ग्राहक
पंचायत एक "जनांदोलन" बन सका।
स्वर्ण जयंती समारोह: राष्ट्र का अभिनंदन, RSS प्रमुख की उपस्थिति
9–10 सितंबर 2023 को हरियाणा के पानीपत ज़िले के पट्टी कल्याणा (समालखा) में संगठन का स्वर्ण जयंती
समारोह भव्यता से आयोजित
हुआ। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत स्वयं उपस्थित रहे और उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।
इस समारोह में
उन्होंने स्पष्ट कहा:
“यदि ग्राहक जागरूक
हो गया, तो राष्ट्र स्वतः
भ्रष्टाचारमुक्त हो जाएगा।”
कार्यक्रम में केंद्रीय उपभोक्ता
कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण
मिश्रा भी मौजूद रहे।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने इसे "मानव अधिकारों की रक्षा में अग्रणी संगठन"
की संज्ञा दी।
आधुनिक युग में भूमिका: आज की चुनौतियों के बीच आशा की किरण
आज के दौर में जब
बड़े कॉरपोरेट घराने और सेवा प्रदाता संस्थाएं ग्राहकों की शिकायतों को अनदेखा कर
देती हैं, तब ‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत’ एक मजबूत ढाल बनकर सामने आती है। चाहे बिजली बिलों में
अनियमितता हो, बीमा कंपनियों की
धोखाधड़ी, मोबाइल नेटवर्क की
लापरवाही हो या ई-कॉमर्स में ठगी — ABGP हर स्तर पर ग्राहकों की आवाज़ बन चुकी है।
राष्ट्र निर्माण में ग्राहक की भूमिका
ABGP केवल एक संगठन नहीं, बल्कि वह विचारधारा है जो मानती है कि जब
ग्राहक जागरूक होगा, तभी समाज
उत्तरदायी बनेगा। और जब समाज उत्तरदायी होगा, तभी राष्ट्र सशक्त होगा। ‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत’ इस उद्देश्य को संघनिष्ठ दृष्टिकोण और राष्ट्रवादी ऊर्जा से
आगे बढ़ा रही है।
इसलिए यह कहना गलत
नहीं होगा कि यह संगठन, RSS की उस दीर्घकालिक सेवा परंपरा का सशक्त
विस्तार है, जो भारत को एक
संगठित, सशक्त और
आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्यरत है।
अगर आप उपभोक्ता
हैं और आपके साथ कोई भी अन्याय या सेवा में लापरवाही हुई है, तो यह संगठन आपके लिए खड़ा है!





