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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:42 · नई दिल्ली संस्करण

टेंडर घोटाले में राहत: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
टेंडर घोटाले में राहत: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

रांची/नई दिल्ली। झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल की जमानत याचिका मंजूर कर ली। ये दोनों आरोपी करीब दो साल से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

सुनवाई के दौरान, आलम के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल मई 2024 से हिरासत में हैं। उन्होंने ट्रायल की कार्यवाही में हो रही देरी का जिक्र किया, जिसकी वजह एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) द्वारा बार-बार दायर की जा रही सप्लीमेंट्री चार्जशीट हैं। संजीव लाल ने भी इन्हीं आधारों पर जमानत याचिका दाखिल की थी। मामला टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।

ईडी ने इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके ओएसडी संजीव लाल और उनके घरेलू सहायक जहांगीर आलम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इससे पहले, 6 मई 2024 को ईडी ने रांची में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। इस दौरान संजीव लाल के सहायक जहांगीर आलम के आवास से करीब 32.2 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे।

वहीं, संजीव लाल के आवास से 10.5 लाख रुपये और उनके सचिवालय स्थित कार्यालय से 2.3 लाख रुपये बरामद हुए थे।

एक डायरी भी जब्त की गई, जिसमें कथित तौर पर कमीशन के लेन-देन का ब्योरा दर्ज था। जांच के बाद, 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने आरोप लगाया है कि सरकारी टेंडर आवंटित करने के बदले कमीशन वसूलने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, ठेकेदारों को कथित तौर पर कुल ठेके की कीमत का लगभग तीन प्रतिशत कमीशन के तौर पर देना पड़ता था।

इसमें से, लगभग 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुंचाई जाती थी, जबकि 0.65 से 1 प्रतिशत राशि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में बांटी जाती थी और शेष राशि इंजीनियरों सहित अन्य कर्मचारियों के बीच साझा की जाती थी।

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