सकट चौथ पर पढ़ें गणेश जी की कथा, सब संकट होंगे दूर, जानें मुहूर्त, चंद्रोदय और पारण समय
इस साल सकट चौथ 29 जनवरी दिन सोमवार को है. सकट चौथ के दिन माताएं संतान
की सुरक्षा और उनके सुखमय जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. शुभ मुहूर्त
में विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा की जाती है और सकट चौथ की व्रत कथा
सुनती हैं. रात के समय में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण करती हैं. सकट चौथ
को तिलकुट चैथ, तिलकुट चतुर्थी, माघ संकष्टी चतुर्थी के नामों से भी जाना
जाता है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डाॅ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं सकट चौथ की व्रत कथा, पूजा मुहूर्त, पारण समय और चंद्रोदय के बारे में.
सकट चौथ की व्रत कथा
1. पहली कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवता गण संकट में घिरे हुए थे, तो वे कैलाश
पर्वत पर भगवान शिव की शरण में आए. वहां पर भगवान गणेश और कार्तिकेय जी
उपस्थित थे. भगवान भोलेनाथ ने अपने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश से पूछा कि
तुम दोनों में से कौन देवाताओं के संकट को दूर करेगा. दोनों ने ही कहा कि
वे देवताओें को संकट से उबार सकते हैं.
भगवान महादेव ने कहा कि तुम दोनों में से जो पहले धरती की परिक्रमा करके
आएगा, उसे ही देवताओं के संकट को दूर करने का अवसर मिलेगा. यह सुनते ही
कार्तिकेय मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने चल दिए.




