हिमाचल में बारिश बनी आफत: 344 सड़कें अब भी बंद, 27 जुलाई से फिर भारी वर्षा का अलर्ट

हिमाचल में बारिश बनी आफत: 344 सड़कें अब भी बंद, 27 जुलाई से फिर भारी वर्षा का अलर्ट
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार तबाही की कहानी लिख रहा है। लगातार बारिश और भूस्खलनों ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रदेश में बीते कुछ दिनों से राहत की सांस जरूर मिली है, लेकिन अब भी हालात सामान्य नहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल में इस वक्त एक राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 344 सड़कें बंद पड़ी हैं, जिनमें से अकेले मंडी जिले में 232 सड़कें अवरुद्ध हैं। कुल्लू में 71 और चंबा में 60 से अधिक सड़कें यातायात के लिए बंद हैं।
प्रदेश में 55 घंटे तक लगातार जाम रहने वाले हाईवे से लेकर गाँवों की आंतरिक सड़कें तक प्रभावित हुई हैं। चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप रहा, जिससे हजारों यात्रियों को रास्ते में ही रुकना पड़ा। इसके अलावा बिजली और जल आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब भी 169 ट्रांसफॉर्मर और 230 जल योजनाएं काम नहीं कर रही हैं।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 20 जून से 23 जुलाई के बीच हुई बारिश में 137 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 77 की मृत्यु भूस्खलन और बाढ़ से और 60 की सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। राज्य को अब तक ₹1,382 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। 40 से अधिक फ्लैश फ्लड, 23 बादल फटने की घटनाएं और 25 से अधिक बड़े भूस्खलन इस मानसून सीजन में दर्ज किए गए हैं।
मौसम विभाग ने 26 जुलाई तक मौसम सामान्य रहने की संभावना जताई है, लेकिन 27 जुलाई से एक बार फिर भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी किया गया है। यह चेतावनी 29 जुलाई तक प्रभावी रहेगी, जिससे पहले से परेशान लोगों के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन राहत और पुनर्बहाली के प्रयासों में जुटे हैं, लेकिन संसाधनों की सीमितता और मौसम की अनिश्चितता से राहत कार्यों में बाधाएं आ रही हैं। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी प्रशासनिक इकाई से संपर्क करें।





