रेलवे होटल टेंडर घोटाला: लालू परिवार के लिए बड़ी कानूनी चुनौती, कोर्ट ने दिए आरोप तय करने के आदेश

आईआरसीटीसी (IRCTC) होटल घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें एक बार फिर काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा उनके बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दे दिए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों के खिलाफ प्रार्थी पद के दुरुपयोग और अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) का मजबूत मामला बनता है।
यह पूरा मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2005 से 2014 के बीच देश के केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के रखरखाव और संचालन के ठेके निजी कंपनियों (सुजाता होटल्स) को देने में नियमों की अनदेखी और धांधली की गई थी। इसके बदले में कथित तौर पर पटना में बेहद कम कीमत पर जमीन के बड़े प्लॉट लालू परिवार के करीबियों और उनकी कंपनियों के नाम ट्रांसफर किए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में इस बात का जिक्र किया है कि किस तरह सुनियोजित तरीके से टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर रेलवे अधिकारियों और निजी पक्षों ने मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया और बाद में उस बेनामी या संदेहास्पद संपत्ति का लाभ लालू परिवार को मिला।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई द्वारा की जा रही इस कानूनी कार्रवाई के तहत अदालत ने कुल 9 आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाई है, जबकि कुछ अन्य आरोपियों को इस मामले में राहत देते हुए बरी भी किया गया है। इससे पहले सीबीआई से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में भी अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई अन्य लोगों पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप तय किए थे। कानूनी जानकारों का मानना है कि औपचारिक रूप से आरोप तय होने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया और ज्यादा तेज हो जाएगी, जो राजनीतिक रूप से भी आरजेडी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।




