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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

1 अप्रैल को पूर्णिमा व्रत: सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृतकाल, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
1 अप्रैल को पूर्णिमा व्रत: सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृतकाल, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में पूर्णिमा व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। 1 अप्रैल बुधवार को चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्ण रूप में प्रकाशित होता है, इसलिए चंद्रोपासना और व्रत रखने से मानसिक शांति, समृद्धि और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

दृक पंचांग के अनुसार, बुधवार को सूर्योदय 6 बजकर 11 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 39 मिनट पर होगा।

वहीं, चंद्रोदय शाम 6 बजकर 11 मिनट पर होगा। तिथि चतुर्दशी सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक, इसके बाद पूर्णिमा है। नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक, इसके बाद हस्त रहेगा। योग वृद्धि दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक, करण वणिज सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 39 मिनट से 5 बजकर 25 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 1 मिनट तक और अमृत काल सुबह 8 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 4 बजकर 17 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा और रवि योग सुबह 6 बजकर 11 मिनट से दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक, यमगंड सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 10 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। बुधवार को भद्रा भी रहेगा, जो कि सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शाम 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

1 अप्रैल को पूर्णिमा व्रत रखने वाले भक्त सुबह से व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन उपवास रख सकते हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ, सत्यनारायण कथा या लक्ष्मी-विष्णु पूजन विशेष फलदायी होता है। पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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