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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:49 · नई दिल्ली संस्करण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक अर्जेंटीना दौरा: भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा का संचार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक अर्जेंटीना दौरा: भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा का संचार

57 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक अर्जेंटीना यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जब ब्यूनस आयर्स पहुंचे, तो वहां के एजेइजा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत हुआ। यह दौरा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि पिछले 57 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी 2018 में G20 शिखर सम्मेलन के लिए अर्जेंटीना आए थे, लेकिन यह दौरा एक विशेष द्विपक्षीय मिशन के रूप में हो रहा है, जो भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता और रणनीतिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है।

भारत-अर्जेंटीना के बहुआयामी संबंधों को मिलेगा नया आयाम

प्रधानमंत्री मोदी अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली से मुलाकात करेंगे, जिसमें दोनों नेता रक्षा, कृषि, खनन, तेल और गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, व्यापार, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा करेंगे। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा भारत और अर्जेंटीना के बीच 'बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी' को एक नई ऊंचाई देगा।

महत्वपूर्ण खनिजों विशेषकर लिथियम पर केंद्रित होगा सहयोग

इस दौरे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है लिथियम जैसे रणनीतिक खनिजों पर भारत की रुचि। लिथियम बैटरियों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में प्रमुख भूमिका निभाता है और भारत इस क्षेत्र में चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है। अर्जेंटीना, जिसे 'लिथियम ट्रायंगल' में गिना जाता है, इस दृष्टि से भारत के लिए एक विश्वसनीय साझेदार बन सकता है। मोदी सरकार की "आत्मनिर्भर भारत" नीति के अंतर्गत यह सहयोग दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया जैसे विविध देशों को जोड़ती है। यह केवल औपचारिक यात्राएं नहीं हैं, बल्कि भारत की 'ग्लोबल साउथ' के साथ बढ़ती भागीदारी और नेतृत्वकारी भूमिका का प्रतीक है। त्रिनिदाद और टोबैगो में पीएम मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद और टोबैगो' से नवाजा गया, जो पहली बार किसी विदेशी नेता को प्रदान किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत बल्कि भारत की वैश्विक छवि को भी सम्मानित करता है।

ब्राजील में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत की वैश्विक भूमिका

अर्जेंटीना के बाद प्रधानमंत्री ब्राजील जाएंगे, जहां वह 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह मंच भारत को वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर देता है। साथ ही पीएम मोदी एक औपचारिक राजकीय दौरे पर भी ब्राजील में रहेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को और मज़बूती मिलेगी।

भारत की विदेश नीति में नया आत्मविश्वास और संतुलन

प्रधानमंत्री मोदी की इस बहु-देशीय यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब केवल पड़ोसी देशों या पश्चिमी शक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दक्षिण, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और कैरिबियन देशों के साथ एक सशक्त साझेदार बनने के लक्ष्य पर कार्य कर रहा है। यह दौरा भारत की स्वतंत्र, संतुलित और बहुपक्षीय विदेश नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां हर क्षेत्र में सहयोग और साझा विकास की भावना प्राथमिकता है।

वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत होती स्थिति

प्रधानमंत्री मोदी का यह अर्जेंटीना दौरा एक राजनयिक यात्रा ही नहीं है , बल्कि भारत की वैश्विक दृष्टि, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का परिचायक है। यह दौरा भारत-अर्जेंटीना संबंधों को एक नई ऊर्जा देगा, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश के अवसर खोलेगा और भारत को वैश्विक रणनीतिक नक्शे पर और अधिक प्रभावशाली बनाएगा। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह यात्रा भारत की विदेश नीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

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