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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:49 · नई दिल्ली संस्करण

प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में ऐतिहासिक संबोधन: "ऑपरेशन सिंदूर भारत की इच्छाशक्ति और विजय का प्रतीक"

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में ऐतिहासिक संबोधन: "ऑपरेशन सिंदूर भारत की इच्छाशक्ति और विजय का प्रतीक"

प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में ऐतिहासिक संबोधन: "ऑपरेशन सिंदूर भारत की इच्छाशक्ति और विजय का प्रतीक"

नई दिल्ली, 29 जुलाई। संसद के मानसून सत्र में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश के सबसे बड़े सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विस्तार से बयान देते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब देने की रणनीति, भारत की सैन्य शक्ति, वैश्विक समर्थन और विपक्ष की भूमिका पर बेबाक टिप्पणी की। प्रधानमंत्री का यह संबोधन जहां भारत की सामरिक सफलता का घोष था, वहीं यह विपक्ष विशेषकर कांग्रेस को देश की सुरक्षा नीति पर बार-बार कटघरे में खड़ा करने वाला भी रहा।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह सत्र भारत के गौरवगान और विजयोत्सव का सत्र है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति की जीत बताते हुए कहा कि वे संसद में देश का पक्ष रखने के लिए खड़े हैं, न कि किसी राजनीतिक दल की तरफ से। उन्होंने इसे आतंक को मिट्टी में मिलाने का विजयोत्सव करार दिया और कहा कि यह विजय उन निर्दोष नागरिकों की आत्मा को समर्पित है, जिन्हें सिर्फ नाम पूछकर मार दिया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा, "हमने वादा किया था आतंकियों को मिट्टी में मिला देंगे – हमने वही किया।" उन्होंने बताया कि सेना को पूर्ण स्वतंत्रता दी गई थी और सिर्फ 22 मिनट में 22 अप्रैल के नरसंहार का बदला ले लिया गया। पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करते हुए भारत ने यह सिद्ध किया कि वह अब परमाणु धमकियों से डरने वाला देश नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, "हम गोली का जवाब गोले से देंगे, और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारेंगे।"

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के एयरबेस आज भी ICU में पड़े हैं, और भारत की सेना ने तीनों मोर्चों पर पाक को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि जब भारत की सेना ने आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल प्रहार किया, तब पाकिस्तान के DGMO खुद भारत से गुहार लगाने लगे कि ऑपरेशन रोका जाए।

प्रधानमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरान उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने किसी वैश्विक दबाव के आगे सिर नहीं झुकाया। उन्होंने स्पष्ट कहा, "दुनिया के किसी नेता ने ऑपरेशन रोकने को नहीं कहा।"

संसद में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, "जब भारत जवाब दे रहा था, तब कांग्रेस मुझ पर हमला कर रही थी।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का छिछोरापन देश का मनोबल गिरा रहा था और उन्हें भारत की सेना और सामर्थ्य पर विश्वास नहीं था। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि जब पहले सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था, तब कांग्रेस ने सेना से सबूत मांगे थे। उन्होंने कहा, "यह कांग्रेस का पुराना रवैय्या है—सेना पर सवाल उठाओ, पाकिस्तान को क्लीन चिट दो।"

प्रधानमंत्री मोदी ने सिन्धु जल संधि को लेकर भी नेहरू युग की आलोचना की और कहा कि इस संधि ने भारत के विकास को रोक दिया। उन्होंने कहा कि सिन्धु नदी पर भारत का अधिकार था, लेकिन उस समय की सरकारों ने देश के हक को त्याग दिया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, यह सब संभव हुआ क्योंकि पिछले 10 वर्षों में देश ने सुरक्षा, तकनीक और सामरिक सोच के क्षेत्र में गहरी तैयारी की। उन्होंने कहा, "आज तकनीक आधारित युद्ध का युग है, और हमारी सेनाएं हर मोर्चे पर तैयार हैं।"

अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है, और यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसम्मान का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन भारत की सैन्य दृढ़ता, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सफलता और जनता की इच्छाशक्ति का प्रमाण है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि नया भारत अब सहने वाला नहीं, बल्कि निर्णायक रूप से जवाब देने वाला राष्ट्र है।

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