प्रधानमंत्री की घाना यात्रा: भारत-घाना संबंधों को 'समग्र साझेदारी' में बदलने का ऐतिहासिक कदम

प्रधानमंत्री की घाना यात्रा: भारत-घाना संबंधों को 'समग्र साझेदारी' में बदलने का ऐतिहासिक कदम
नई दिल्ली /अक्रा (घाना), 03 जुलाई 2025: तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक घाना यात्रा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति जॉन महामा के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में भारत-घाना संबंधों को एक "समग्र साझेदारी" के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने घाना की धरती पर कदम रखते ही स्थानीय लोगों की गर्मजोशी, आत्मीयता और सम्मान के लिए आभार प्रकट किया और कहा कि “अय्य मे अनेजे से मेवोहा” की भावना को साकार करते हुए यह यात्रा दोनों देशों के बीच एक नई ऊंचाई का संकेत है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति महामा को दिसंबर 2024 के आम चुनावों में मिली ऐतिहासिक जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह घाना के नागरिकों का उनके नेतृत्व में दृढ़ विश्वास का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और घाना के बीच की मित्रता केवल औपचारिक नहीं बल्कि साझा मूल्यों, आजादी के संघर्ष और समावेशी विकास के सपनों पर आधारित है। उन्होंने घाना को पश्चिम अफ्रीका का "Beacon of Hope" बताते हुए लोकतांत्रिक आदर्शों में उसके योगदान की सराहना की।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को "Comprehensive Partnership" का दर्जा देने का निर्णय लिया, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत घाना के राष्ट्र निर्माण में केवल एक सहयोगी नहीं, बल्कि एक सह-यात्री के रूप में उपस्थित है।
भारत द्वारा बनाए गए जुबिली हाउस, विदेश सेवा संस्थान, कोमैंडा शुगर फैक्ट्री, ICT केंद्र और तेमा-पकदान रेलवे लाइन जैसे संरचनाएं केवल ईंट और पत्थर नहीं, बल्कि गहरी साझेदारी के प्रतीक हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 3 बिलियन डॉलर के पार पहुँच चुका है और इसे अगले पाँच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय कंपनियों ने अब तक लगभग 900 परियोजनाओं में दो बिलियन डॉलर का निवेश किया है।
फिनटेक क्षेत्र में भारत अपने UPI डिजिटल पेमेंट मॉडल को घाना के साथ साझा करने को तैयार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि “विकास साझेदारी” भारत-घाना संबंधों का मूल स्तंभ है और राष्ट्रपति महामा के आर्थिक पुनर्गठन प्रयासों में भारत पूर्ण समर्थन देगा।
भारत ने घाना के लिए आईटेक और ICCR स्कॉलरशिप को दोगुना करने की घोषणा की है। साथ ही एक Skill Development Centre की स्थापना, 'Feed Ghana' कार्यक्रम में सहयोग, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देने, और वैक्सीन उत्पादन में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई गई है।
रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए हैं। सशस्त्र बलों की ट्रेनिंग, मैरीटाइम सिक्योरिटी, रक्षा आपूर्ति और साइबर सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स के खनन क्षेत्र में भी भारतीय कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में घाना को Global Biofuels Alliance से जोड़ने के भारत के प्रस्ताव को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और घाना दोनों ग्लोबल साउथ के सदस्य हैं और उसकी प्राथमिकताओं के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने Voice of Global South समिट में घाना की भागीदारी के लिए आभार प्रकट किया और African Union को G20 की स्थायी सदस्यता दिलाने में भारत की भूमिका को साझा उपलब्धि बताया।
संयुक्त राष्ट्र सुधारों को लेकर दोनों देशों का दृष्टिकोण एकजैसा है। पश्चिम एशिया और यूरोप में जारी संघर्षों पर भी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि “यह युद्ध का युग नहीं है” और समस्याओं का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।
घाना में बसे भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक सेतु बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षक, डॉक्टर और इंजीनियर यहाँ की सामाजिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति महामा को भारत की यात्रा का निमंत्रण देते हुए भरोसा जताया कि वे भारत आकर दोनों देशों की मित्रता को और गहराई देंगे।
अंत में प्रधानमंत्री ने घाना सरकार और वहाँ की जनता के प्रति उनके आत्मीय स्वागत और अतुलनीय आतिथ्य के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
यह यात्रा केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम के साथ साथ , भारत-घाना संबंधों के स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है।





