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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:49 · नई दिल्ली संस्करण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को किया मनोनीत, राष्ट्र निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को किया मनोनीत, राष्ट्र निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को किया मनोनीत, राष्ट्र निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2025 — भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने देश के उच्च सदन राज्यसभा के लिए चार नए सदस्यों को मनोनीत किया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए जाने जाते हैं। इन चार नामों में शामिल हैं — देश के प्रसिद्ध अभियोजक उज्ज्वल निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, प्रख्यात इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन, और केरल के समाजसेवी सी. सदानंदन मास्टर।

इन नियुक्तियों को भारत की लोकतांत्रिक विविधता और समावेशिता का प्रतीक माना जा रहा है। उज्ज्वल निकम ने 1993 मुंबई बम धमाकों और अजमल कसाब जैसे मामलों में अपने अद्भुत वकालत कौशल से आतंकवाद के खिलाफ न्याय का परचम लहराया है। वहीं हर्षवर्धन श्रृंगला, जो भारत के विदेश सचिव और अमेरिका में राजदूत रह चुके हैं, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की आवाज़ को सशक्त बनाने के लिए जाने जाते हैं।

इतिहास को समसामयिक दृष्टिकोण से जोड़ने वाली विदुषी डॉ. मीनाक्षी जैन ने भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों को अकादमिक रूप से पुनर्परिभाषित करने में अहम भूमिका निभाई है। साथ ही, सी. सदानंदन मास्टर, जो केरल में दलित एवं आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे हैं, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की मिसाल बन चुके हैं।

राष्ट्रीय सागर परिवार की ओर से इन चारों विभूतियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन! हमें विश्वास है कि उनके विचार, अनुभव और प्रतिबद्धता राज्यसभा में नीतिगत चर्चाओं को और भी समृद्ध बनाएंगे और देश के लोकतांत्रिक मूल्य और मजबूत होंगे।

इन नामों की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब संसद में वैचारिक विविधता, विशेषज्ञता और लोकहित के प्रति प्रतिबद्धता की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है। यह नियुक्तियाँ न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि देश के युवाओं को यह संदेश भी देती हैं कि समर्पण, सत्य और सेवा से ही राष्ट्र निर्माण संभव है।

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