एसवाईएल मुद्दे पर सकारात्मक पहल: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जताई समाधान की उम्मीद

एसवाईएल मुद्दे पर सकारात्मक पहल: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जताई समाधान की उम्मीद
नई दिल्ली, 9 जुलाई 2025
सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के वर्षों से लंबित विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को नई दिल्ली में हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सार्थक संवाद किया। यह बैठक न केवल दोनों राज्यों के संबंधों में सकारात्मकता का संकेत है, बल्कि वर्षों पुराने जल विवाद के समाधान की आशा भी जगा रही है।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल सहित दोनों राज्यों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि इस संवाद को आगे बढ़ाते हुए अगली बैठक 5 अगस्त 2025 को आयोजित की जाएगी, जिसमें संभावित समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक के उपरांत बातचीत में बताया कि बैठक का वातावरण अत्यंत सकारात्मक और सहमति आधारित रहा। उन्होंने कहा, “हमने आज बेहद शांतिपूर्ण और रचनात्मक ढंग से चर्चा की। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जी ने भी स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा अब समाप्त होना चाहिए क्योंकि यह बहुत लंबे समय से लंबित है। यह समझदारी और समरसता का संकेत है।”
मुख्यमंत्री सैनी ने यह भी कहा कि दोनों राज्य वर्षों से एक ही सांस्कृतिक भूमि के अंग हैं, आपसी भाईचारे और विश्वास के साथ जीते हैं। “हरियाणा और पंजाब दोनों भाई हैं, और आज भी एक ही आंगन में रहते हैं। ऐसे में विवाद का स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान निकलना चाहिए। मुझे विश्वास है कि अगली बैठक में जरूर कोई सार्थक हल सामने आएगा,” उन्होंने कहा।
एसवाईएल नहर का मुद्दा हरियाणा और पंजाब के बीच दशकों से चला आ रहा एक संवेदनशील मामला है, जिसमें पानी के बंटवारे को लेकर मतभेद बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भी कई वर्षों तक समाधान नहीं निकल पाया था। अब जब केंद्र सरकार ने इस विषय को प्राथमिकता पर लेते हुए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद की प्रक्रिया आरंभ की है, तो इससे एक बार फिर उम्मीद जगी है कि न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अब यह चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से हटकर आपसी सहमति और संवैधानिक व्यवस्था के तहत हो रही है। यह संकेत है कि सरकारें अब टकराव नहीं, समाधान की राजनीति करना चाहती हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यह साझा समझदारी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
पानी जैसे संवेदनशील और जीवन से जुड़े मसले पर अगर दोनों राज्यों के बीच स्थायी समाधान निकलता है, तो यह पूरे देश के लिए सहकारी संघवाद का आदर्श उदाहरण बन सकता है। आने वाली 5 अगस्त की बैठक अब केवल औपचारिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बन सकती है — जहां वर्षों पुराना जल विवाद अंततः समाधान की ओर अग्रसर होगा।
इस संवाद प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं जल शक्ति मंत्रालय की भूमिका इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार राज्यों के जटिल मुद्दों के समाधान के लिए सक्रिय पहल कर रही है। यह पहल यदि सफल होती है, तो यह केवल एसवाईएल विवाद का अंत नहीं होगा, बल्कि भारत के संघीय ढांचे में विश्वास, सहयोग और समाधान का एक नया अध्याय भी होगा।





