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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:56 · नई दिल्ली संस्करण

Bihar: पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी को आपत्तिजनक पोजिशन में देखना अवैध संबंध नहीं

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
Bihar: पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी को आपत्तिजनक पोजिशन में देखना अवैध संबंध नहीं

पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में तलाक की अर्जी को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल पत्नी को किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लेने से अवैध संबंध (व्यभिचार) साबित नहीं होता। पटना हाईकोर्ट ने जोर दिया कि आपत्तिजनक पोजिशन और शारीरिक संबंध बनाना दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पति यौन संबंध का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। यह फैसला 3 सितंबर 2026 को जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की पीठ ने सुनाया।

मामला समस्तीपुर के व्यक्ति का था, जिसकी शादी मधुबनी की एक युवती से 2 जुलाई 2006 को हुई थी। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी का अपनी बड़ी बहन के पति (जीजा) के साथ अवैध संबंध था। पति ने दावा किया कि उसने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देखा, जिसके बाद पत्नी ने क्रूरता की और 30 मार्च 2013 को अपने पिता के साथ घर छोड़कर चली गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर पति ने तलाक की मांग की थी। पत्नी ने कोर्ट में अवैध संबंध के आरोपों को मनगढ़ंत बताकर खारिज किया और स्वयं क्रूरता बताया। उसने आरोप लगाया कि पति ने मुझे जहर देकर मारने की कोशिश की थी, जिसके बाद घर छोड़ना पड़ा।

मधुबनी फैमिली कोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाकर तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। पति ने फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(आई) के तहत अवैध संबंध साबित करने के लिए शारीरिक संबंध का पुख्ता प्रमाण जरुरी है। पति सिर्फ आपत्तिजनक स्थिति देखने का दावा कर रहा था, लेकिन न पुलिस में शिकायत की और न ही उसके आरोप को किसी और ने समर्थन दिया।

कोर्ट ने रेखांकित किया कि व्यभिचार को संदेह से परे साबित करना होता है, केवल संभावना जता देना पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के हरगोविंद सोनी बनाम रामदुलारी (1985) फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें व्यभिचार साबित करने की कानूनी जटिलता पर बल दिया गया था, क्योंकि इसके सीधे सबूत मिलना दुर्लभ है और यह अक्सर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर करता है।

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