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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

पेरिस को मिला भव्य BAPS हिंदू मंदिर, सितंबर में होगा शुभारंभ

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस के उपनगर 'बूसी-सेंट-जॉर्जेस' में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर अब अपने ऐतिहासिक उद्घाटन के समीप पहुंच गया है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन68 बार पढ़ा गया
पेरिस को मिला भव्य BAPS हिंदू मंदिर, सितंबर में होगा शुभारंभ

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस के उपनगर 'बूसी-सेंट-जॉर्जेस' में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर अब अपने ऐतिहासिक उद्घाटन के समीप पहुंच गया है। मंदिर के शिखरों और केंद्रीय गुंबद पर कलश एवं ध्वजा दंड पूजन जैसी पारंपरिक वैदिक रस्में पूरी की जा रही हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने शांति, सद्भाव और जनकल्याण के लिए वैदिक मंत्रोच्चार और प्रार्थनाएं भी कर रहे हैं। कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भव्य उत्सव के साक्षी बनेंगे।

बीएपीएस की आधिकारिक साइट के अनुसार, इस मंदिर का उद्घाटन 2 से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ यानी ‘पेरिस मंदिर महोत्सव’ के दौरान किया जाएगा। यह आयोजन बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन को समर्पित होगा और इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और शुभचिंतक शामिल होंगे।

महोत्सव के दौरान जल यात्रा, पेरिस में नगर यात्रा, बूसी-सेंट-जॉर्जेस में पालखी यात्रा, प्रतिदिन वैदिक महायज्ञ, मूर्ति-प्रतिष्ठा समारोह, समर्पण सभा और कीर्तन आराधना जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बीएपीएस के मुताबिक, पेरिस का यह मंदिर फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण बूसी-सेंट-जॉर्जेस स्थित एस्पलेनैड डेस रिलिजन्स एट डेस कल्चर्स में किया गया है, जहां विभिन्न धर्मों के उपासना स्थल मौजूद हैं।

इस स्थान को धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है।

मंदिर की वास्तुकला में सदियों पुरानी भारतीय शिल्प परंपरा का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के पत्थरों को भारत में तराशकर तैयार किया गया और फिर उन्हें फ्रांस ले जाकर भारतीय शिल्पकारों तथा फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से मंदिर में स्थापित किया गया।

इस मंदिर की नींव रखने का ऐतिहासिक समारोह सितंबर 2022 में हुआ था।

इसके बाद जून 2024 में मंदिर की आधारभूत संरचना के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण शुरू हुआ।

बीएपीएस पेरिस की सोशल मीडिया पोस्ट में महंत स्वामी महाराज से लेकर वरिष्ठ संतों और दुनियाभर के श्रद्धालुओं के एक स्वर में “पेरिस मंदिर महोत्सव नी जय!” के उद्घोष का उल्लेख किया गया है।

इसका भाव मंदिर के उद्घाटन को लेकर सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक एकता से जुड़ा है।

इन पोस्ट्स में एक परिवार ऐसा भी है जिसकी तीन पीढ़ियां मिलकर सपना साकार होते एक साथ देखेंगी। पहली पीढ़ी 80 के दशक में पहुंची। गुजराती मूल के परिवार के मुताबिक वो दौर ऐसा था जब एक-दो ही हिंदू परिवार रहते थे।

फिर दूसरी पीढ़ी ने वो सहा जो विदेशी जमीन पर अक्सर अनजाने लोगों के साथ होता है। लोगों को हिंदू धर्म के बारे में बताते थे तो वो हंसते थे या मजाक उड़ाते थे लेकिन अपने बड़ों से जो सीखा उसे छोड़ा नहीं।

हिंदू संस्कृति, संस्कारों और अध्यात्म की मशाल तीसरी पीढ़ी तक पहुंची। ऐसी पीढ़ी जो फ्रेंच तो बोलती है लेकिन विशुद्ध हिंदू रंग में रंगी है। बच्चे बोलते हैं कि अपने बड़ों के साथ सत्संग में जाते थे, अपने धर्म को समझते थे। अब विश्वास नहीं हो रहा कि यहां भी हमारा मंदिर होगा, वाकई हम खुद को भाग्यवान मानते हैं।

बच्चे खुश हैं, कहते हैं, "हमारे दोस्त, जब अपनी आंखों के सामने भव्य मंदिर बनते देख रहे हैं तो हमसे हमारे धर्म के बारे में जानने की कोशिश करते हैं और ये हमें बहुत अच्छा लगता है।"

मंदिर महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। बीएपीएस ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, कला और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को सामने लाने वाले वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है।

पेरिस जैसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और हिंदू आध्यात्मिक परंपरा का यह नया केंद्र निश्चित तौर पर भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। सितंबर में होने वाला मंदिर महोत्सव इस लंबे निर्माण सफर के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

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