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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

सोमवार को बाबा महाकाल के दर पर भक्तों का सैलाब, मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से गूंजा पूरा परिसर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सोमवार को बाबा महाकाल के दर पर भक्तों का सैलाब, मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से गूंजा पूरा परिसर

उज्जैन। ज्येष्ठ माह की शुक्ल नवमी तिथि पर तड़के विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पूरा मंदिर परिसर शिवभक्तों के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

सोमवार होने की वजह से भक्तों का सैलाब उमड़ा हुआ था। बाबा महाकाल के दर्शन प्राप्त करने के लिए देश-विदेश से आए भक्तों ने रविवार देर रात से ही कतारों में लगना शुरू कर दिया था। रातभर कतारबद्ध होने के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। हर कोई अपने आराध्य देव की एक झलक पाने को आतुर था।

रोजाना नियमानुसार वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। इस दौरान वहां मौजूद भक्तों का उत्साह देखने लायक था। पूरा मंदिर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों के सैलाब के बीच पूरे परिसर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी।

इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से स्नान कराया गया। पंचामृत स्नान के बाद बाबा महाकाल का बेहद मनमोहक और अलौकिक शृंगार किया गया।

सोमवार को बाबा महाकाल का भांग, चंदन और सूखे मेवों से शृंगार किया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा बाबा को भस्म रमाई गई, जिसमें बाबा को भस्म अर्पित कर आरती उतारी गई।

इस दौरान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

भस्म आरती का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल जैसे विभिन्न पेड़ों की लकड़ियों की राख का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान महाकाल निराकार रूप में होते हैं। माना जाता है कि दूषण नामक राक्षस का संहार करने के बाद भगवान शिव ने उसकी राख से अपना शृंगार किया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

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