कड़ी मेहनत, पास किया इंटरव्यू, फिर भी छीन गई नौकरी! IIT ने 22 कंपनियों को किया 2 साल बैन

देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों IIT के छात्रों के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। कड़ी मेहनत से JEE क्रैक किया, 4 साल पढ़ाई की, फिर लाखों छात्रों में से इंटरव्यू पास कर ऑफर लेटर हासिल किया, लेकिन जॉइनिंग से ठीक पहले कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। ऐसे 150 से ज्यादा IITians की नौकरियां छिन गईं। अब IITs ने इस पर सबसे कड़ा एक्शन लिया है। All IITs Placement Committee (AIPC) ने 22 कंपनियों के खिलाफ 2 साल के लिए बैन का फैसला किया है। इसमें अमेरिकी सॉफ्टवेयर दिग्गज Oracle का नाम सबसे ऊपर है।
दरअसल ये मामला 2026 में पास हुए बैच का है। देश के 23 IITs में 22 कंपनियों ने 150 से ज्यादा छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट में ऑफर दिया था। छात्रों ने दूसरी कंपनियों के ऑफर ठुकरा दिए क्योंकि उन्हें ये नौकरी मिल गई थी। लेकिन कंपनियों ने उन्हें ऑनबोर्ड ही नहीं किया। AIPC ने कंपनियों को 15 सितंबर तक डेडलाइन दी थी कि वे छात्रों को जॉइन कराएं, लेकिन कई कंपनियों ने कोई जवाब नहीं दिया। कैंपस सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ Oracle ने ही करीब 40 ऑफर्स को वापस लिया है। कुछ कंपनियों ने 10 से 15-15 ऑफर रद्द किए हैं। पिछले साल 10-11 कंपनियों ने ऐसा किया था, लेकिन इस बार संख्या दोगुनी हो गई है, जो पिछले कई सालों में सबसे बड़ी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी वजह ग्लोबल टेक मंदी और AI है। कई बड़ी टेक कंपनियां AI पर ज्यादा खर्च कर रही हैं और पुराने रोल्स खत्म कर रही हैं। Oracle ने खुद पिछले एक साल में ग्लोबली 21,000 कर्मचारियों को निकाला है और 1.84 अरब डॉलर का रीस्ट्रक्चरिंग खर्च दिखाया है। भारत में भी कंपनी ने कई राउंड में छंटनी की है। कुछ स्टार्टअप्स भी इस लिस्ट में हैं जो फंडिंग खत्म होने से ऑफर पूरा नहीं कर पाए। इस महीने IIT गुवाहाटी में हुई AIPC की मीटिंग में ये फैसला लिया गया। AIPC के कन्वीनर प्रोफेसर जॉन जोस ने बताया कि 30 सितंबर तक सभी 22 कंपनियों को मेल करके बता दिया जाएगा कि अगले 2 प्लेसमेंट सीजन तक IITs उनके साथ "Non-Cooperation" करेंगे।
खास बात ये है कि IITs इसे "ब्लैकलिस्ट" नहीं कह रहे, बल्कि "असहयोग" कह रहे हैं। इसका मतलब है कि ये कंपनियां 2 साल तक किसी भी IIT के कैंपस प्लेसमेंट सिस्टम के जरिए हायरिंग नहीं कर पाएंगी। छात्रों का कहना है कि ये फैसला जरूरी था, क्योंकि ऑफर लेटर हाथ में होने के बाद छात्र प्लेसमेंट प्रोसेस से बाहर हो जाते हैं और बाद में ऑफर रद्द होने पर उनके पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं बचता।





