ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से ईडी ने की 9 घंटे तक पूछताछ, कल फिर से बुलाया

ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से ईडी ने की 9 घंटे तक पूछताछ, कल फिर से बुलाया
रांची : टेंडर कमीशन घोटाला मामले में मंत्री आलमगीर आलम से ईडी ने तकरीबन नौ घंटे तक पूछताछ की है। वहीं ईडी ने आलमगीर आलम को एक बार फिर से बुधवार को ईडी ऑफिस आने को कहा है। मंगलवार को मंत्री आलमगीर आलम समय से पहले ही ईडी कार्यालय पहुंचे थे। ईडी की ओर से उन्हें 12 मई को समन जारी कर 14 मई को 11 बजे पूछताछ के लिए ईडी के रीजनल कार्यालय में आने को कहा था। आपको बता दें कि मंत्री आलमगीर आलम के ओएसडी संजीव लाल की पत्नी रीता लाल भी ईडी ऑफिस पहुंची थी। जिसके बाद आलमगीर आलम, संजीव लाल और उसकी पत्नी रीता लाल को ईडी आमने -सामने बैठाकर पूछताछ की। ईडी ने आलमगीर आलम से आय-व्यय और अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज साथ लेकर आने को कहा था। झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री को उनके पीएस संजीव लाल और सहायक जहांगीर आलम के घर से 35.23 करोड़ रूपया बरामद होने के बाद ईडी की ओर से समन किया गया था। ईडी ने आलमगीर आलम से बरामद कैश के बारे में पूछताछ की है। ईडी ने यह भी पूछा कि कहां कहां से कमीशन की राशि आती थी और कहां बटती थी। मालुम हो कि झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के ओएसडी और उनके दूसरे सहयोगियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद बरामद 35 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। इस मामले में मंत्री के पीए संजीव लाल, संजीव के नौकर जहांगीर आलम को ईडी ने 7 मई को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तरी के बाद जहांगीर ने ईडी के सामने खुलासा किया था कि बरामद करोड़ों रुपए पीए संजीव लाल के हैं। वहीं संजीव लाल ने बताया कि पूरे पैसे विभाग में टेंडर देने के बदले मिले कमीशन का है और कमीशन का पैसा अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक जाता था। ईडी ने संजीव लाल और उनके नौकर जहांगीर आलम की रिमांड नोट में टेंडर के खेल की पूरी जानकारी कोर्ट को दी है। ईडी ने कोर्ट को यह जानकारी दी है कि पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच के दौरान यह पता चला है कि वीरेंद्र कुमार राम ( गिरफ्तार) झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग से एक इंजीनियर है और ग्रामीण कार्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग (विशेष प्रमंडल), झारखंड सरकार के मुख्य अभियंता के रूप में प्रतिनियुक्ति थे। वीरेंद्र कुमार राम टेंडर देने के लिए कमीशन एकत्र करता था और उस कमीशन का 1.5 प्रतिशत का निर्धारित हिस्सा अपने वरिष्ठों और राजनेताओं के बीच वितरित करता था। जांच के दौरान विभाग के अन्य अधिकारियों की भी वसूली में संलिप्तता पाई गई।





