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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक केस में छह पर शिकंजा, प्रोफेसर भी गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक केस में छह पर शिकंजा, प्रोफेसर भी गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष के दूसरे सेमेस्टर की कीट विज्ञान परीक्षा का प्रश्नपत्र शुक्रवार को परीक्षा से ठीक पहले लीक हो गया। इस मामले में राज्य पुलिस ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्ग के एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि पुलिस और साइबर यूनिट की टीमों ने छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, कवर्धा, राजनांदगांव और बिलासपुर में ताबड़तोड़ दबिश दी। पुख्ता तकनीकी सबूतों और व्हाट्सऐप चैट के आधार पर पुलिस ने शनिवार सुबह इन सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सामने आया कि पर्चा दुर्ग से निकलकर कवर्धा के छात्रों तक पहुंचा और फिर व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से अन्य विद्यार्थियों में फैल गया। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े कई छात्रों से भी लंबी पूछताछ की है और कवर्धा के दो छात्रों को नोटिस देकर रायपुर बुलाया गया है।

पुलिस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि कीट विज्ञान का यह प्रश्नपत्र सबसे पहले दुर्ग के एक निजी एग्रीकल्चर कॉलेज से बाहर (लीक) किया गया था। पुलिस ने रायपुर, दुर्ग, कवर्धा, राजनांदगांव और बिलासपुर सहित 4 से 5 जिलों में छापेमारी कर 16 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद ही मुख्य कड़ियों को जोड़कर 6 प्रमुख गिरफ्तारियां की गईं। बताया गया है कि परीक्षा से ठीक 2 घंटे पहले (सुबह करीब 8 बजे) छात्रों को व्हाट्सऐप ग्रुप पर कोई स्कैन कॉपी नहीं, बल्कि एक टेक्स्ट फाइल सर्कुलेट हुई थी। इस फाइल में 18 महत्वपूर्ण सवाल लिखे हुए थे। जब मूल प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों पर सुबह 9:30 बजे खुला और 10 बजे परीक्षा शुरू हुई, तो मिलान करने पर पता चला कि उस टेक्स्ट फाइल के 70 प्रतिशत से अधिक सवाल असली प्रश्नपत्र से हूबहू मिल रहे थे।

गिरफ्तार किया गया मुख्य संदिग्ध दुर्ग के एक निजी कॉलेज में कार्यरत एक प्रोफेसर है, जिस पर पेपर को सबसे पहले बाहर भेजने का आरोप है। गिरफ्तार किए गए अन्य 5 लोगों में इसी नेटवर्क से जुड़े कॉलेज छात्र शामिल हैं, जिन्होंने व्हाट्सऐप के माध्यम से आगे प्रश्नपत्र को फैलाया था।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 20 अगस्त को यह परीक्षा आयोजित होनी थी। प्रश्नपत्र पहले ही सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे, लेकिन परीक्षा शुरू होने से महज दो घंटे पहले ही पूरा पर्चा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप पर धड़ल्ले से प्रसारित होने लगा।

जैसे ही विश्वविद्यालय प्रबंधन तक इस बात की भनक लगी, बिना कोई देर किए तत्काल प्रभाव से परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया। कवर्धा कॉलेज के अधिष्ठाता और बिलासपुर के एक कॉलेज द्वारा ई-मेल के जरिए विश्वविद्यालय को इसकी आधिकारिक शिकायत दी गई थी, इसके बाद तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

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