मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:58 · नई दिल्ली संस्करण

गृह मंत्रालय की इस पहल की वजह से डेढ़ साल लंबे इंतजार के बाद भारत पहुंचीं 150 से अधिक पाकिस्तानी दुल्हनें

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
गृह मंत्रालय की इस पहल की वजह से डेढ़ साल लंबे इंतजार के बाद भारत पहुंचीं 150 से अधिक पाकिस्तानी दुल्हनें

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से जुड़ने वाले बॉर्डर बंद कर दिया है। वाघा अटारी बॉर्डर बंद होने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों की डोर भी कमजोर पड़ गईं। तनाव के माहौल में एक-दूसरे देश में शादी की उम्मीदें कम हो गई थीं। करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद फिर से उम्मीदें जगी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे भारतीय शहरों में पहुंचीं और शादी की रस्में निभाईं।

गृह मंत्रालय ने सिंध के एक सम्मानित धार्मिक स्थल के साथ मिलकर इन यात्राओं के लिए विशेष छूट दी। पाकिस्तानी रिश्तेदारों को दुल्हन के साथ आने की इजाजत तो थी, लेकिन उन्हें तय समय के अंदर वापस लौटना था, इसलिए शादियां सादगी से हुईं। टीओआई को पाकिस्तानी दुल्हनों के वीजा परमिट और दस्तावेज मिले हैं और हमने कई खुशहाल पाकिस्तानी जोड़ों से बात भी की है। सामान्य समय में भारत का वीजा रखने वाले पाकिस्तानी वाघा बॉर्डर से आसानी से आ-जा सकते थे, लेकिन अब ज़मीनी बॉर्डर बंद होने के कारण उन्हें हवाई रास्ते से घूमकर आना पड़ा। इस साल अप्रैल से जून के बीच दुल्हनें करीब 450 रिश्तेदारों के साथ भारत आईं।

रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय के वीजा पर भारत में रह रहे इंकेश जशनानी की सगाई ऑपरेशन सिंदूर से पहले हुई थी और उन्होंने पिछले साल शादी की योजना बनाई थी। उनकी होने वाली पत्नी आरती, सिंध की खानपुर तहसील से मुश्किल सफर तय करके मई 2025 में वाघा बॉर्डर से सिर्फ़ एक किलोमीटर दूर पहुंची थीं, तभी भारत ने अटारी गेट बंद कर दिया। एक साल से ज़्यादा समय के बाद, आरती मस्कट होते हुए नागपुर आईं और मार्च में शादी की। वीजा पाबंदियों के कारण उनके साथ सिर्फ उनके भाई आए, जबकि उनके माता-पिता पीछे ही रह गए। वह कहती हैं कि काश बॉर्डर खुल जाएं और मैं उनसे एक बार मिल सकूं।

भारतीय नागरिकता लेने के बाद नागपुर में रहने वाले संजय कलानी की सगाई तीन साल पहले सिंध के घोटकी जिले की काजल से हुई थी और उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। शादी पिछले साल होनी थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद काजल और उनका परिवार बॉर्डर पार नहीं कर पाया। उसके बाद इंतज़ार कभी न खत्म होने वाला लगने लगा। आखिरकार 5 महीने पहले यह कपल शादी के बंधन में बंधा, जब काजल कराची से मस्कट होते हुए दिल्ली और फिर नागपुर पहुंचीं। संजय के भाई धीरज को भी तब राहत मिली जब उनकी मंगेतर संजना, सिंध की एक अंदरूनी तहसील मीरपुर से उसी रास्ते से भारत आईं।

सिंध के घोटकी शहर में स्थित मशहूर शदानी दरबार ने पाकिस्तान में फंसी दुल्हनों का मुद्दा उठाने में अहम भूमिका निभाई। दरबार के पीठाधीश, संत युधिष्ठिरलाल शदानी अब रायपुर में रहते हैं। 18वीं सदी के संत शदाराम साहिब के सम्मान में बनाए गए शदानी दरबार का बॉर्डर के दोनों ओर रहने वाले समुदाय के लिए बहुत महत्व है। समुदाय के नेता का कहना है कि यह सिंध से आया पहला जत्था है और भारत सरकार को इंतज़ार कर रही दूसरी दुल्हनों के लिए भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए। भारत में शादी करने के लिए अभी भी 300 लड़कियां इंतजार कर रही हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें