जानिए उन दो अधिकारियों को जिन पर टिकी है भारत और चीन के शीर्ष नेताओं की बातचीत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ताओं की कई तस्वीरें सामने आईं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ताओं की कई तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के अलावा दो ऐसे शख्स भी प्रमुखता से नजर आए, जो लगभग हर उच्च स्तरीय मुलाकात से पहले अपने नेताओं के साथ होते हैं। ये दोनों व्यक्ति अपने-अपने देश के सबसे विश्वसनीय और अनुभवी दुभाषिए (इंटरप्रेटर) हैं, जो भारत और चीन के विदेश सेवा अधिकारी हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ दिखने वाले अधिकारी सिद्धार्थ बाबू हैं, वहीं राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ उनके चीनी समकक्ष सन निंग मौजूद रहते हैं।
ये दुभाषिए सिर्फ भाषाओं के बीच शाब्दिक अनुवाद नहीं करते, बल्कि उच्च-स्तरीय कूटनीति में संवाद को सहज, सटीक और सांस्कृतिक बारीकियों के साथ प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पर्दे के पीछे रहकर दो देशों के बीच शांतिपूर्ण और रचनात्मक बातचीत सुनिश्चित करने वाले प्रमुख स्तंभ हैं। इनकी भूमिका इतनी संवेदनशील होती है कि इन्हें न केवल भाषा का गहरा ज्ञान होता है, बल्कि दोनों देशों की संस्कृति, राजनीतिक संवेदनशीलता और कूटनीतिक प्रोटोकॉल की भी गहन समझ होती है। नेताओं का इन पर अटूट विश्वास होता है, क्योंकि एक गलत अनुवाद पूरी बातचीत का रुख बदल सकता है और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अनुवादक सन निंग की भाषा पर दक्षता असाधारण है। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन के विदेश मंत्रालय ने उन्हें विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही अपनी सेवा में ले लिया था। सन निंग ने हाई स्कूल में अंग्रेजी प्रतियोगिता जीती थी और कॉलेज में भाषण प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया था। उनकी यह उपलब्धि उनकी असाधारण भाषाई क्षमता और समर्पण को दर्शाती है, जिससे वे चीन की वैश्विक कूटनीति का एक अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के साथ दिखने वाले अधिकारी सिद्धार्थ बाबू केरल के कोच्चि के निवासी हैं। वे 2017 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी हैं।
सिद्धार्थ बाबू को कई भाषाओं में महारत हासिल है, जिनमें मंदारिन और अंग्रेजी प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में दुभाषिए के रूप में नियमित रूप से दिखाई देते रहे हैं। उनकी उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि भारत के हितों और प्रधानमंत्री के संदेश को पूरी सटीकता, बारीकी और अपेक्षित कूटनीतिक संवेदनशीलता के साथ संप्रेषित किया जा सके। दोनों ही दुभाषिए अपने नेताओं के विश्वासपात्र और कूटनीतिक वार्ताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो वैश्विक मंच पर देशों के संबंधों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका काम अक्सर अदृश्य होता है, लेकिन इसका प्रभाव अमूल्य होता है।



