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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:48 · नई दिल्ली संस्करण

रक्षा क्षेत्र को बड़ी मजबूती, 52,000 करोड़ रुपये की खरीद परियोजनाओं को हरी झंडी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
रक्षा क्षेत्र को बड़ी मजबूती, 52,000 करोड़ रुपये की खरीद परियोजनाओं को हरी झंडी

नई दिल्ली। देश के सशस्त्र सैन्य बलों को और अधिक आधुनिक व शक्तिशाली बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में लगभग 52,000 करोड़ रुपए की पूंजीगत रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी (एओएन) प्रदान की गई।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में स्वीकृत इन प्रस्तावों का उद्देश्य तीनों सेनाओं की युद्धक क्षमता, निगरानी व्यवस्था, वायु रक्षा और भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करना है। डीएसी ने भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है।

इनमें एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली 'आकाश तरंग', मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, टैंकों के लिए सक्रिय सुरक्षा प्रणाली तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली शामिल हैं।

'आकाश तरंग' प्रणाली सेना की अग्रिम तैनातियों और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से सुरक्षा प्रदान करेगी। यह प्रणाली ड्रोन का पता लगाने, उन्हें बाधित करने और निष्क्रिय करने में सक्षम है। वहीं, एंटी-टैंक मिसाइल से इन्फेंट्री की ताकत बढ़ेगी। मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली सेना की इन्फेंट्री टुकड़ियों को दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ अधिक प्रभावी बनाएगी।

इससे अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन तथा अन्य हवाई खतरों को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगी।

बहु-स्पेक्ट्रल सेंसर से लैस नई प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं के बावजूद प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी।

सक्रिय सुरक्षा प्रणाली टैंकों की ओर आने वाली मिसाइलों और रॉकेटों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर सकेगी। इससे युद्धक्षेत्र में टैंकों के सुरक्षित बने रहने की क्षमता बढ़ेगी। वहीं, नई पीढ़ी के जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम होंगे। ये अधिक गति, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता, अधिक मारक शक्ति और कम लागत के कारण भविष्य के युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय नौसेना के लिए बहु-प्रभावी समुद्री माइन, नौसैनिक जहाजों से संचालित मानवरहित हवाई प्रणाली तथा विद्युत प्रणोदन प्रणाली के लिए भूमि आधारित परीक्षण सुविधा स्थापित करने को मंजूरी दी गई है।

बहु-प्रभावी समुद्री माइन दुश्मन के युद्धपोतों और नौसैनिक अभियानों की स्वतंत्र आवाजाही को सीमित करने में मदद करेगी।

इससे समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा और मजबूत होगी। उन्नत सेंसरों से लैस नई मानवरहित हवाई प्रणाली नौसेना को समुद्र में दूर तक निगरानी रखने, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और वास्तविक समय में जानकारी जुटाने में सहायता देगी।

नई प्रणोदन प्रणाली के लिए स्थापित की जाने वाली परीक्षण सुविधा, नौसेना के भविष्य के जहाजों और प्रणालियों के परीक्षण तथा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वहीं, भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित उच्च ऊंचाई स्यूडो सैटेलाइट प्रणाली सहित अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्रणाली लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने, संचार सेवाएं उपलब्ध कराने और दूरसंवेदी कार्यों को अंजाम देने में सक्षम होगी।

इससे वायुसेना को सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने में बड़ी सहायता मिलेगी।

डीएसी की इस मंजूरी को भारत की रक्षा आधुनिकीकरण प्रक्रिया और आत्मनिर्भरता अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से तीनों सेनाओं की युद्धक तैयारी, तकनीकी श्रेष्ठता और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, स्मार्ट मिसाइलों और उन्नत निगरानी प्रणालियों जैसे आधुनिक युद्धक साधनों पर भी तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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