आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि: डीआरडीओ और एम्स बीबीनगर ने विकसित किया देश का पहला किफायती 'कार्बन फाइबर फुट प्रोस्थेसिस'

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि: डीआरडीओ और एम्स बीबीनगर ने विकसित किया देश का पहला किफायती 'कार्बन फाइबर फुट प्रोस्थेसिस'
हैदराबाद, 16 जुलाई 2025 –
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) और एम्स बीबीनगर के वैज्ञानिकों ने मिलकर भारत में ही विकसित किया गया पहला किफायती और उन्नत 'कार्बन फाइबर फुट प्रोस्थेसिस' (ADIDOC) लॉन्च किया है। इसका अनावरण 14 जुलाई 2025 को एम्स बीबीनगर, तेलंगाना में किया गया। इस कार्यक्रम में DRDL के निदेशक और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. जी.ए. श्रीनिवास मूर्ति और एम्स बीबीनगर के कार्यकारी निदेशक डॉ. अहंथेम सांता सिंह ने भाग लिया।
ADIDOC (AIIMS Bibinagar – DRDL, DRDO Indigenously Developed Optimised Carbon Foot Prosthesis) को विशेष रूप से भारतीय amputees की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन और विकसित किया गया है। यह प्रोस्थेसिस बायोमैकेनिकल परीक्षण में 125 किलोग्राम तक का भार वहन करने में सक्षम पाया गया है और इसमें सुरक्षा के लिए आवश्यक फैक्टर ऑफ सेफ्टी भी मौजूद है। इसके तीन विभिन्न वेरिएंट बनाए गए हैं, ताकि अलग-अलग वजन वर्ग के मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्रोस्थेसिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध उत्पादों के मुकाबले काफी किफायती है। जहां मौजूदा आयातित प्रोस्थेसिस की कीमत लगभग ₹2 लाख तक होती है, वहीं ADIDOC की उत्पादन लागत ₹20,000 से भी कम आंकी गई है। इससे यह भारत के कम आय वर्ग के विकलांग नागरिकों के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाला और सुलभ विकल्प बन सकता है।
इस innovation से न केवल देश की विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि यह सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह भारत में विकलांगजनों के जीवन में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और गरिमा को बढ़ावा देगा।DRDO और AIIMS बीबीनगर की यह संयुक्त पहल दर्शाती है कि जब देश के संस्थान आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो विश्वस्तरीय समाधान भी स्वदेश में संभव होते हैं।





